वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा मुख्यालय ‘पेंटागन’ ने पहली बार स्वीकार किया है कि ईरान के साथ चल रही इस जंग में उसने अपने सैनिकों को खोया है। पेंटागन के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले 10 दिनों से जारी इस संघर्ष में अब तक 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और लगभग 140 सैनिक घायल हुए हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जवाबी हमलों को और तेज कर दिया है।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बताया कि घायल 140 सैनिकों में से 108 मामूली चोटों के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जबकि 8 सैनिकों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत के पोर्ट शुएबा और सऊदी अरब में हुए ड्रोन और रॉकेट हमलों में इन सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युद्ध में सैनिकों को खोना दुखद है, लेकिन ‘अमेरिका फर्स्ट’ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यह एक ‘जरूरी छोटी यात्रा’ (Short Excursion) है।
ईरान का सख्त रुख: “हमलावर को सिखाएंगे सबक”
दूसरी ओर, ईरान ने किसी भी प्रकार के युद्धविराम (Ceasefire) की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने स्पष्ट किया कि तेहरान अब “युद्ध-बातचीत-युद्ध” के पुराने चक्र को तोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमारा इरादा युद्धविराम का नहीं, बल्कि हमलावर को ऐसा सबक सिखाने का है कि वह भविष्य में दोबारा ईरान की तरफ देखने की हिम्मत न करे। सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने भी दोहराया कि तेहरान इस जंग को निर्णायक अंत तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का मैदान
युद्ध का सबसे घातक असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने धमकी दी है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने देंगे। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से चोक (बंद) कर दिया है और वहां बारूदी सुरंगें (Naval Mines) बिछाने के संकेत दिए हैं। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने समुद्री रास्ते में कोई बाधा डाली, तो उस पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया जाएगा। अमेरिका ने साफ किया है कि वह समुद्री रास्तों को खुला रखने के लिए अपनी पूरी सैन्य शक्ति का उपयोग करेगा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच न रहकर पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है। दुबई और अन्य खाड़ी देशों के हवाई अड्डों पर परिचालन ठप है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, न तो अमेरिका और न ही ईरान पीछे हटने को तैयार दिख रहे हैं, जिससे आने वाले दिन और भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकते हैं।
