US-Israel-Iran War: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के बीच एक नया संकेत सामने आया है कि ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन की संख्या में कुछ कमी आई है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे रणनीतिक कारण हो सकते हैं। जानकारी के मुताबिक ईरान ने अपने कुछ ट्रक आधारित मिसाइल लॉन्चर और मिसाइलों को भूमिगत बंकरों से निकालकर दूसरी जगहों पर स्थानांतरित कर दिया है, ताकि संभावित हवाई हमलों से उन्हें बचाया जा सके।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम हथियारों को सुरक्षित रखने और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फैलाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पिछले कई वर्षों में ईरान ने अपने बड़े मिसाइल भंडार को सुरक्षित रखने के लिए पहाड़ों और भूमिगत सुरंगों में कई विशाल बंकर बनाए थे, जिन्हें आम तौर पर “मिसाइल सिटी” कहा जाता है। युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमान और ड्रोन इन ठिकानों पर लगातार निगरानी कर रहे हैं और जैसे ही लॉन्चर बाहर निकलते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
ईरान के कुल मिसाइल भंडार को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जाते रहे हैं। युद्ध से पहले इजरायली सेना का अनुमान था कि ईरान के पास लगभग 2,500 मिसाइलें हैं, जबकि कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या 6,000 तक हो सकती है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर हुई भारी बमबारी के कारण कुछ मिसाइलें और लॉन्चर बंकरों के भीतर ही फंस गए हैं। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में कई भूमिगत ठिकानों के प्रवेश द्वारों के पास नष्ट हुए लॉन्चर और मिसाइलों के अवशेष दिखाई दिए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार दक्षिणी शहर शिराज के आसपास स्थित मिसाइल ठिकानों को कई बार निशाना बनाया गया है। इसके अलावा इस्फहान, तबरीज और केरमानशाह के पास स्थित सैन्य अड्डों पर भी हमलों की जानकारी सामने आई है।
इसी बीच इजरायल की वायु सेना ने शुक्रवार तड़के राजधानी तेहरान में एक बड़ा हवाई हमला करने का दावा किया है। इजरायली सेना के अनुसार इस अभियान में करीब 50 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। यह हमला इजरायल की सैन्य खुफिया जानकारी और मोसाद के साथ समन्वय के आधार पर किया गया था।
इजरायल का कहना है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व परिसर के नीचे बने एक भूमिगत बंकर को निशाना बनाया गया। सेना के मुताबिक यह बंकर एक सुरक्षित आपातकालीन कमांड सेंटर के रूप में बनाया गया था, जहां से युद्ध के दौरान सैन्य गतिविधियों का संचालन किया जा सकता था।
इजरायली वायु सेना के बयान के अनुसार यह भूमिगत परिसर तेहरान के मध्य में कई सड़कों के नीचे फैला हुआ था और इसमें कई प्रवेश द्वार, नियंत्रण कक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों के लिए विशेष कमरे बनाए गए थे। सैन्य अधिकारियों का दावा है कि ईरान ने वर्षों तक इस तरह के भूमिगत ठिकानों को विकसित किया ताकि युद्ध की स्थिति में अपनी सैन्य योजनाओं को सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और निगरानी के कारण ईरान अपनी मिसाइल क्षमताओं को बचाकर रखने और लंबे संघर्ष की तैयारी करने की रणनीति अपना सकता है। इससे संकेत मिलता है कि यह टकराव जल्द खत्म होने की बजाय लंबा चल सकता है।
