West Asia Crisis: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के बाद पश्चिम एशिया के हालात बेहद नाजुक हो गए हैं। इस बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने मोर्चा संभालते हुए क्षेत्रीय नेताओं को सख्त आगाह किया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस नाजुक मोड़ पर किसी भी देश द्वारा की गई एक छोटी सी गलती पूरे गल्फ क्षेत्र को एक ऐसे विनाशकारी युद्ध में झोंक सकती है, जिससे उबरना नामुमकिन होगा।
सऊदी अरब की नाराजगी और कूटनीतिक सक्रियता
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के समय और उनके बड़े पैमाने से काफी नाखुश है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्रिंस सलमान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधा है। उनका संदेश स्पष्ट है: फिलहाल कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए जिससे ईरान को उकसावा मिले। सऊदी नेतृत्व का मानना है कि ईरान के जवाबी हमले उम्मीद से कम रहे हैं, इसलिए गल्फ देशों को संयम बरतकर तनाव कम करने का प्रयास करना चाहिए। इसी क्रम में सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान भी लगातार क्षेत्रीय समकक्षों के संपर्क में हैं।
पुरानी दुश्मनी भुलाकर साथ आए MBS और MBZ
इस कूटनीतिक हलचल में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ सऊदी क्राउन प्रिंस सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद (MBZ) के बीच हुई बातचीत रही। यमन और सूडान के मुद्दों पर महीनों से चल रहे मतभेदों के बावजूद, ईरान संकट ने दोनों शक्तिशाली नेताओं को फिर से संवाद की मेज पर ला खड़ा किया है। यह बातचीत क्षेत्र में सुरक्षा की गंभीर चुनौती को दर्शाती है।
युद्ध से दूर रहने की सऊदी रणनीति
सऊदी अरब की सबसे बड़ी चिंता यमन के हूती विद्रोही हैं। रियाद को डर है कि युद्ध फैलने की स्थिति में हूती विद्रोही, जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है, लाल सागर और गल्फ क्षेत्र में बड़े हमले शुरू कर सकते हैं। सऊदी विश्लेषकों के अनुसार, रियाद फिलहाल खुद को इस संघर्ष से पूरी तरह तटस्थ रखना चाहता है। प्रिंस सलमान की कोशिश बैक-चैनल कूटनीति के जरिए युद्ध की आग को फैलने से रोकने की है।
बाहरी ताकतों के दखल का डर
कतर के पूर्व प्रधानमंत्री हमाद बिन जसीम ने भी गल्फ देशों को ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि युद्ध से क्षेत्रीय संसाधन खत्म होंगे और बाहरी शक्तियों को इस क्षेत्र पर नियंत्रण करने का मौका मिल जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो अमेरिका गल्फ देशों पर अपनी जमीन से सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने के लिए दबाव डाल सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की पूरी कोशिश इस विनाशकारी संघर्ष को रोकने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर टिकी है।
