हक्कानी की सीधी चेतावनी: “एक दिन भी पूरी ताकत लगा दी, तो बदल देंगे पाकिस्तान का भूगोल”; फिदायीन हमलों की दी धमकी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। तालिबान सरकार के ताकतवर गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को खुलेआम ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमलों की धमकी दी है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। तालिबान सरकार के ताकतवर गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को खुलेआम ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमलों की धमकी दी है। खोस्त में दिए गए एक कड़े भाषण में हक्कानी ने नाटो और अमेरिका के खिलाफ अपनी 20 साल की लंबी जंग का हवाला देते हुए कहा कि यदि तालिबान ने अपनी पूरी क्षमता का मात्र एक दिन भी पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया, तो वे पड़ोसी देश का भूगोल बदलने की ताकत रखते हैं।

हक्कानी का यह बयान इसलिए अधिक खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि उनका ‘वार मॉडल’ रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब की पारंपरिक युद्ध नीति से बिल्कुल अलग है। जहां मुल्ला याकूब अफगान तोपों और सेना के जरिए सीमा पर सीधे मुकाबले पर जोर दे रहे हैं, वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी जंग को अफगानिस्तान की धरती से निकालकर पाकिस्तान के अंदरूनी शहरों तक ले जाने की वकालत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हक्कानी उसी आत्मघाती और कॉम्प्लेक्स हमले की रणनीति का जिक्र कर रहे हैं, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति नाटो को दो दशकों तक अफगानिस्तान में उलझाए रखा था।

इस तनाव को और हवा देने का काम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद के उस आदेश ने किया है, जिसमें उन्होंने अपने लड़ाकों को पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हमले करने के निर्देश दिए हैं। महसूद ने स्पष्ट किया है कि ये हमले ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ की रक्षा के लिए किए जाएंगे। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के मजबूत प्रभाव और स्थानीय समर्थन को देखते हुए पाकिस्तान के लिए इन आंतरिक हमलों को रोकना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

मौजूदा स्थिति को देखते हुए सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान एक ऐसे जाल में फंसता नजर आ रहा है, जहां उसे न केवल सीमा पर पारंपरिक युद्ध लड़ना पड़ रहा है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हक्कानी नेटवर्क की यह धमकी कि वे पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमलों की लहर शुरू कर सकते हैं, क्षेत्र में एक बड़े मानवीय और सुरक्षा संकट की आहट दे रही है। जिस तरह अमेरिका अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी तालिबान की इस गुरिल्ला और फिदायीन रणनीति का तोड़ नहीं निकाल पाया था, वही डर अब पाकिस्तानी सेना और जनरल असीम मुनीर के सामने खड़ा है।

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