अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। तालिबान सरकार के ताकतवर गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को खुलेआम ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमलों की धमकी दी है। खोस्त में दिए गए एक कड़े भाषण में हक्कानी ने नाटो और अमेरिका के खिलाफ अपनी 20 साल की लंबी जंग का हवाला देते हुए कहा कि यदि तालिबान ने अपनी पूरी क्षमता का मात्र एक दिन भी पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल कर लिया, तो वे पड़ोसी देश का भूगोल बदलने की ताकत रखते हैं।
हक्कानी का यह बयान इसलिए अधिक खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि उनका ‘वार मॉडल’ रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब की पारंपरिक युद्ध नीति से बिल्कुल अलग है। जहां मुल्ला याकूब अफगान तोपों और सेना के जरिए सीमा पर सीधे मुकाबले पर जोर दे रहे हैं, वहीं सिराजुद्दीन हक्कानी जंग को अफगानिस्तान की धरती से निकालकर पाकिस्तान के अंदरूनी शहरों तक ले जाने की वकालत कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हक्कानी उसी आत्मघाती और कॉम्प्लेक्स हमले की रणनीति का जिक्र कर रहे हैं, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति नाटो को दो दशकों तक अफगानिस्तान में उलझाए रखा था।
𝗛𝗮𝗾𝗾𝗮𝗻𝗶 𝗧𝗵𝗿𝗲𝗮𝘁𝗲𝗻𝘀 𝗣𝗮𝗸𝗶𝘀𝘁𝗮𝗻 𝘄𝗶𝘁𝗵 𝗡𝗔𝗧𝗢-𝗦𝘁𝘆𝗹𝗲 𝗪𝗮𝗿
— Afghan Analyst (@AfghanAnalyst2) February 27, 2026
Referring to the Taliban’s tough war against NATO, Sirajuddin Haqqani said that if the Taliban were to fight Pakistan even for a single day with the same intensity, they could “redraw… pic.twitter.com/WzzQgJPjYQ
इस तनाव को और हवा देने का काम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद के उस आदेश ने किया है, जिसमें उन्होंने अपने लड़ाकों को पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हमले करने के निर्देश दिए हैं। महसूद ने स्पष्ट किया है कि ये हमले ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’ की रक्षा के लिए किए जाएंगे। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के मजबूत प्रभाव और स्थानीय समर्थन को देखते हुए पाकिस्तान के लिए इन आंतरिक हमलों को रोकना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
Taliban guerrilla war mastermind, Siraj Haqqani today’s sermon in Khost is important where he described “revenge,”indicating a possible shift from Mullah Yaqoob's open confrontation to Haqqani's asymmetric approach. Let's take war to Pakistan instead of bringing it to Afghanistan https://t.co/fiA7NrysO7
— Ihsanullah Tipu Mehsud (@IhsanTipu) February 27, 2026
मौजूदा स्थिति को देखते हुए सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान एक ऐसे जाल में फंसता नजर आ रहा है, जहां उसे न केवल सीमा पर पारंपरिक युद्ध लड़ना पड़ रहा है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हक्कानी नेटवर्क की यह धमकी कि वे पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमलों की लहर शुरू कर सकते हैं, क्षेत्र में एक बड़े मानवीय और सुरक्षा संकट की आहट दे रही है। जिस तरह अमेरिका अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी तालिबान की इस गुरिल्ला और फिदायीन रणनीति का तोड़ नहीं निकाल पाया था, वही डर अब पाकिस्तानी सेना और जनरल असीम मुनीर के सामने खड़ा है।
