प्रयागराज में वेदपाठी बटुकों के कथित यौन शोषण के मामले में आरोपी बनाए गए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोमवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और खुद पर लगे आरोपों को एक सोची-समझी साजिश करार दिया। शंकराचार्य ने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच उत्तर प्रदेश के बजाय किसी गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से कराई जाए।
शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन यह पूरी कार्रवाई उनके और शंकराचार्य पद के सम्मान को ठेस पहुंचाने का एक ‘कुत्सित प्रयास’ है। उन्होंने सनातन परंपरा के पात्रों ‘कालनेमि, राहु और रावण’ का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि छद्म वेश धारण करने वाले हमेशा से रहे हैं, लेकिन अंत में उनका पर्दाफाश होकर रहता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, सरकार उनकी ‘गौ-संरक्षण’ की मांग और उनके मुखर रुख से विचलित है, इसलिए उन्हें इस तरह के आरोपों में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
अपनी बेगुनाही के सबूत के तौर पर शंकराचार्य ने सीसीटीवी फुटेज और मीडिया कवरेज का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के समय से ही वे लगातार कैमरों की निगरानी में रहे हैं, ऐसे में यौन शोषण जैसे घिनौने कृत्य का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन बच्चों ने शिकायत दर्ज कराई है, वे कभी उनके आश्रम या शिविर का हिस्सा ही नहीं रहे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में गिरफ्तारी जैसी कोई स्थिति बनती है, तो यह पूरी शंकराचार्य संस्था को अपमानित करने जैसा होगा।
इधर, प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस फिलहाल शिकायतकर्ता बटुकों की तलाश कर रही है ताकि उनका मेडिकल परीक्षण और बयान दर्ज कराया जा सके। दूसरी तरफ, शंकराचार्य की लीगल टीम अब अग्रिम जमानत और अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। फिलहाल, प्रयागराज के मठों और संतों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर भारी आक्रोश और चर्चाओं का बाजार गर्म है।
