हरारे, जिम्बाब्वे: आईसीसी पुरुष अंडर-19 विश्व कप 2026 के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में भले ही भारतीय टीम ने इंग्लैंड को करारी शिकस्त देकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया हो, लेकिन व्यक्तिगत उपलब्धियों के मामले में इंग्लैंड के युवा सलामी बल्लेबाज बेन मायस ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारत द्वारा रखे गए 412 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए मायस ने 28 गेंदों में 45 रनों की संक्षिप्त लेकिन बेहद आक्रामक पारी खेली। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसने भारतीय स्टार वैभव सूर्यवंशी के कुछ ही घंटों पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।
दो घंटे के भीतर पलटा वैभव सूर्यवंशी का रिकॉर्ड
फाइनल की पहली पारी में भारत के 14 वर्षीय सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया था। हालांकि, वैभव की यह बादशाहत ज्यादा देर नहीं टिकी। दूसरी पारी में जैसे ही बेन मायस ने अपनी पारी का 45वां रन पूरा किया, उन्होंने वैभव को पछाड़कर टूर्नामेंट के ‘लीडिंग रन-स्कोरर’ का खिताब अपने नाम कर लिया। जहां वैभव सूर्यवंशी ने 439 रनों के साथ टूर्नामेंट का अंत किया, वहीं बेन मायस 444 रनों के साथ इस वर्ल्ड कप के सबसे सफल बल्लेबाज बनकर उभरे।
बेन मायस का टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन
इंग्लैंड के इस प्रतिभावान बल्लेबाज ने अंडर-19 विश्व कप 2026 के दौरान अपनी निरंतरता और आक्रामक शैली से सबको प्रभावित किया। मायस के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने 7 मैचों की 7 पारियों में एक बार नाबाद रहते हुए कुल 444 रन बनाए। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 74.00 का रहा और उन्होंने 112.40 के शानदार स्ट्राइक रेट से रन बटोरे। पूरे टूर्नामेंट में मायस के बल्ले से एक विशाल शतक और दो महत्वपूर्ण अर्धशतक निकले। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 191 रन रहा, जो उन्होंने स्कॉटलैंड के विरुद्ध बनाया था।
विश्व कप की दूसरी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी
बेन मायस ने इस टूर्नामेंट में न केवल रनों का अंबार लगाया, बल्कि वे ‘हाईएस्ट इंडिविजुअल स्कोर’ की सूची में भी दूसरे स्थान पर रहे। श्रीलंका के वीरेन चामुदिता ने जापान के विरुद्ध 192 रनों की पारी खेलकर इस सूची में पहला स्थान हासिल किया था। बेन मायस (191 रन) दूसरे पायदान पर रहे, जबकि वैभव सूर्यवंशी की फाइनल वाली 175 रनों की पारी तीसरे स्थान पर काबिज हुई। मायस के टूर्नामेंट के स्कोर (34, 20, 77*, 191, 34, 53, 24 और 45) उनकी बेहतरीन फॉर्म की गवाही देते हैं।
फाइनल में एक गलत शॉट ने खत्म की उम्मीदें
लक्ष्य का पीछा करते हुए बेन मायस भारतीय गेंदबाजों, विशेषकर खिलान पटेल पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने अपनी 45 रनों की पारी में कई आकर्षक शॉट्स लगाए और इंग्लैंड को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, 13वें ओवर की आखिरी गेंद पर एक जोखिम भरा ‘रिवर्स स्वीप’ खेलने का प्रयास उनके लिए घातक साबित हुआ। खिलान पटेल की फिरकी को पढ़ने में चूक करने के बाद मायस ने सीधा कैच थमा दिया और पवेलियन लौट गए। उनके आउट होते ही इंग्लैंड की जीत की उम्मीदें धूमिल पड़ने लगीं और अंततः भारतीय टीम ने 100 रनों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की।
भले ही बेन मायस अपनी टीम को विश्व चैंपियन बनाने में विफल रहे हों, लेकिन 444 रनों के साथ शीर्ष स्कोरर बनना उनके करियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह युवा बल्लेबाज आने वाले समय में इंग्लैंड की सीनियर टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
