Suspense Over NCP Merger: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने एनडीए के साथ पार्टी की प्रतिबद्धता को लेकर स्थिति साफ कर दी है। तटकरे ने कहा कि एनसीपी का भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह मजबूत और कायम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो नेता एनडीए के साथ रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपने राजनीतिक फैसले लें। उनके इस बयान को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी-एसपी को दिया गया अप्रत्यक्ष संदेश माना जा रहा है। साथ ही इसे एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय के खिलाफ एक मजबूत संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, हाल के दिनों में एनसीपी के दोनों धड़ों के एकीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी पहले यह कहा था कि दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं की भावना है कि पार्टी को एकजुट किया जाए। हालांकि, विमान हादसे में निधन के बाद अजित पवार गुट के रुख में बदलाव नजर आने लगा है। उधर, शरद पवार ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि अजित पवार की इच्छा को पूरा किया जाना चाहिए। इसके विपरीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि यदि विलय की बातचीत अंतिम चरण तक पहुंच चुकी होती, तो अजित पवार उन्हें इसकी जानकारी जरूर देते।
सुनील तटकरे का यह बयान उसी पृष्ठभूमि में आया है, जब उनसे दोनों एनसीपी गुटों के विलय को लेकर सवाल किया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की राजनीतिक लाइन स्वीकार करनी होगी। साथ ही तटकरे ने उन लोगों पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही विलय की चर्चाएं शुरू कर दी थीं। उन्होंने पूछा कि इतनी संवेदनशील घड़ी में इस तरह की राजनीतिक अटकलें क्यों फैलाई गईं।
हाल ही में सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद यह कयास और तेज हो गए थे कि दोनों गुटों के बीच संभावित बातचीत फिलहाल ठंडे बस्ते में जा सकती है। इस बीच एनसीपी-एसपी के विधायक रोहित पवार ने कहा कि पवार परिवार में 13 दिनों तक कोई राजनीतिक चर्चा नहीं होगी और इसके बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार की ओर से कोई भी कदम पूरी सोच-समझ के साथ उठाया जाएगा।
तटकरे के बयान से यह साफ हो गया है कि अजित पवार गुट फिलहाल एनडीए के साथ अपनी प्रतिबद्धता को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। यदि भविष्य में विलय की कोई प्रक्रिया आगे बढ़ती भी है, तो वह अजित पवार गुट की शर्तों पर ही होगी। दूसरी ओर, शरद पवार गुट की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से महाराष्ट्र की राजनीति में असमंजस बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवाद की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा बयानबाजी यह दर्शाती है कि दोनों पक्ष फिलहाल रणनीतिक दबाव बनाने में जुटे हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर इस पर कोई गंभीर चर्चा चल रही होती, तो उपमुख्यमंत्री अजित पवार उन्हें जरूर बताते। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार को न तो किसी बातचीत की जानकारी है और न ही विलय की किसी तारीख की। उनका बयान शरद पवार के उस दावे के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की घोषणा तय थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अजित पवार भाजपा और गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लिए बिना कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकते और कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी बीच दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की स्मृति में बारामती में एक भव्य स्मारक बनाए जाने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। इस पहल की अगुवाई स्वयं शरद पवार कर रहे हैं। प्रस्तावित स्मारक विद्या प्रतिष्ठान परिसर में बनाया जाएगा, जहां 28 जनवरी को अजित पवार का अंतिम संस्कार किया गया था। शरद पवार अपनी पत्नी प्रतिभा पवार के साथ परिसर पहुंचे और ट्रस्ट के सदस्यों के साथ स्मारक की रूपरेखा पर चर्चा की। विद्या प्रतिष्ठान के सदस्य किरण गुजर के अनुसार, शोक अवधि समाप्त होने के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
