अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध लगातार और भी खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। इन हमलों के बाद चाबहार, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, सीरिक, कोनारक, रास्क, खोंदाब, खुर्रमाबाद और सेमनान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। पहली बार उत्तरी ईरान के कुछ इलाकों में भी धमाकों की सूचना मिली है।
ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी तेहरान, पकदश्त और परचिन के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। सेमनान एयरपोर्ट के कुछ हिस्सों को भी निशाना बनाया गया, हालांकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई। केवल एक शेड और एयरपोर्ट टर्मिनल की कुछ खिड़कियों को नुकसान पहुंचा है।
अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका ने यह भी कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे एक ईरानी ऑयल टैंकर को हेलफायर मिसाइल से रोक दिया, जबकि दो अन्य जहाजों का रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया गया।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के तहत कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरान के अनुसार कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर अमेरिकी रडार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ईंधन भंडार को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर संचार प्रणाली और रडार ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया गया। वहीं जॉर्डन ने पुष्टि की कि उसकी वायुसेना ने देश की ओर बढ़ रही आठ ईरानी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया। ईरान ने दक्षिण-पश्चिमी शहर अंदिमेश्क के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन गिराने का भी दावा किया है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अहवाज के शहीद बघाई अस्पताल से 211 मरीजों को एहतियातन दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। समुद्री व्यापार से जुड़ी संस्था लॉयड्स लिस्ट के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गैर-ईरानी जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। कई जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर ‘डार्क ट्रांजिट’ का सहारा ले रहे हैं। लगातार चौथे दिन ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई चिंता पैदा हो गई है।
