ईरान में खामेनेई के जनाजे में कई देशों की मौजूदगी, लेकिन तीन खाड़ी देशों की गैरहाजिरी चर्चा में

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जहाँ भारत, चीन और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हुए, वहीं यूएई, बहरीन और कुवैत की अनुपस्थिति ने बड़ी कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। ड्रोन हमलों की नाराजगी और राष्ट्रीय हितों के चलते गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की अंदरूनी दरार खुलकर सामने आ गई है।

Ali Khamenei Funeral: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल मसीह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान तेहरान में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिस पर पूरी मुस्लिम दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इस मौके पर दुनिया भर से बड़े-बड़े प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचे। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री ने शिरकत की, चीन ने अपना विशेष दूत भेजा, रूस के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे, तुर्की के उपराष्ट्रपति तेहरान पहुंचे और पाकिस्तान का तो पूरा शीर्ष नेतृत्व ही वहां मौजूद था। मध्य एशिया के कई देशों ने भी इसमें हिस्सा लिया। लेकिन इस विशाल अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति के बीच तीन प्रमुख मुस्लिम देशों—संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत की अनुपस्थिति सबसे बड़ी कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।

ये तीनों देश न केवल मुस्लिम बहुल राष्ट्र हैं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ भी हैं। इसके बावजूद, तेहरान में इन देशों की अनुपस्थिति गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की आंतरिक राजनीति, खाड़ी में शिया-सुन्नी प्रतिद्वंद्विता और हालिया सैन्य संघर्षों से उपजे गहरे अविश्वास को बयां करती है।

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की स्थापना 25 मई 1981 को हुई थी, जिसमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान शामिल हैं। इस संगठन की स्थापना के पीछे एक बड़ा उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में शिया बहुल ईरान के बढ़ते वैचारिक और सैन्य प्रभाव को संतुलित करना था। बहरीन को छोड़कर काउंसिल के बाकी पांच देश सुन्नी बहुल हैं। बहरीन की स्थिति और भी जटिल है; यह एक शिया बहुल देश है, लेकिन यहाँ की सत्ता सुन्नी अल खलीफा राजशाही के हाथ में है, जो लंबे समय से ईरान पर अपने आंतरिक मामलों में दखल देने और शिया समुदाय को भड़काने का आरोप लगाती आई है। दूसरी ओर, यूएई और ईरान के बीच अबू मूसा और टुंब द्वीपों को लेकर पुराना क्षेत्रीय विवाद है। कुवैत ने हमेशा ईरान से एक सतर्क दूरी बनाए रखी है। हालिया क्षेत्रीय युद्ध के दौरान, ईरान ने अपने शाहेद ड्रोनों और मिसाइलों से इन खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों पर भारी हमले किए थे, जिससे यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, अली खामेनेई के जनाजे से यूएई, बहरीन और कुवैत का दूरी बनाना केवल एक कूटनीतिक प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि ईरान के हमलों के खिलाफ उनकी गहरी नाराजगी का सीधा प्रदर्शन है। यूएई की विदेश नीति अब “सुरक्षा पहले” के सिद्धांत पर टिकी है। अबू धाबी ईरान को एक क्षेत्रीय खतरे के रूप में देखता है और अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका व इजरायल के साथ सैन्य-आर्थिक गठबंधन मजबूत कर रहा है। यदि ईरानी हमलों को झेलने के बाद भी यूएई अपना प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजता, तो उसकी घरेलू राजनीति में यह संदेश जाता कि वह शिया बहुल ईरान के सामने झुक गया है। बहरीन में अमेरिका का बड़ा नौसैनिक अड्डा है, जिसके कारण उसका झुकाव पूरी तरह वाशिंगटन की ओर है। इन तीनों देशों के लिए अमेरिका सुरक्षा का सबसे प्रमुख साझेदार है। ईरानी मीडिया ने इस अनुपस्थिति को “अमेरिकी दबाव” का परिणाम बताया है, जिस पर इन तीनों अरब देशों ने चुप्पी साध रखी है।

यूएई और बहरीन के विपरीत, सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अपने प्रतिनिधि भेजकर क्षेत्रीय कूटनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। सऊदी अरब ने उपविदेश मंत्री वलीद अल खुरैजी के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय डेलिगेशन भेजा। ईरान द्वारा सऊदी अरब पर भी ड्रोन हमले किए जाने के बावजूद, रियाद का तेहरान में शामिल होना यह दिखाता है कि वह अमेरिका की संभावित नाराजगी की परवाह न करते हुए ईरान के साथ तनाव कम करने और एक स्वतंत्र विदेश नीति पर आगे बढ़ने का इच्छुक है। कतर हमेशा से ईरान के साथ व्यावहारिक संबंध रखता आया है और वर्तमान में एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका में है। वहीं ओमान पारंपरिक रूप से तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच संवाद का सेतु रहा है।

इस घटनाक्रम ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के भीतर की दरार और सऊदी अरब व यूएई के बीच चल रही अघोषित क्षेत्रीय होड़ को पूरी तरह उजागर कर दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि खाड़ी की आधुनिक राजनीति अब केवल धार्मिक एकजुटता पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और रणनीतिक गठबंधनों पर आधारित हो चुकी है। यूएई, बहरीन और कुवैत के इस बहिष्कार ने खामेनेई के अंतिम संस्कार को मुस्लिम एकता के वैश्विक प्रतीक के रूप में पेश करने के ईरान के प्रयासों को पूरी तरह असफल कर दिया है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale