बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गया है। इस सीट के लिए अधिसूचना जारी होने के साथ ही सोमवार से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे, जबकि 14 जुलाई को स्क्रूटनी होगी और 16 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इस सीट पर 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। यह सीट भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने और विधायक पद से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है, जो लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे।
बांकीपुर हमेशा से भाजपा का एक मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन इस बार का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खुद इस सीट से चुनाव मैदान में उतरने का एलान कर दिया है, जिससे यह मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल हो गया है। प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को मौजूदा सरकार के कामकाज पर एक जनमत संग्रह की तरह बताया है। उनके मैदान में आने से जहां मुकाबला रोचक हुआ है, वहीं कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में उन्हें समर्थन देने को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं, जिससे विपक्षी खेमे की हलचल बढ़ गई है।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय जनता दल इस सीट पर अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है और उसने मजबूती से अपनी दावेदारी ठोक दी है। राजद के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है कि पार्टी अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनावी तैयारियों में मुस्तैदी से जुट गई है। उन्होंने पिछले चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी प्रत्याशी को पचास हजार के आसपास वोट मिले थे, जो इस क्षेत्र में राजद के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। शक्ति यादव ने दावा किया है कि उनके कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं और ऐसी जमीन तैयार हो चुकी है जिससे सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार को मात दी जा सके।
महागठबंधन में इस सीट को लेकर फिलहाल सस्पेंस और खींचतान की स्थिति बनी हुई है कि उम्मीदवार राजद का होगा या कांग्रेस का। इस बीच राजद ने अपने सहयोगी दलों से उम्मीद जताई है कि वे इस उपचुनाव में उनके प्रत्याशी का पूरा समर्थन करेंगे। अब देखना यह होगा कि भाजपा अपने इस पुराने किले को बचाने के लिए किस चेहरे पर दांव खेलती है, क्योंकि प्रशांत किशोर की सीधी एंट्री और राजद के आक्रामक तेवरों ने बांकीपुर की चुनावी लड़ाई को बेहद कांटे का बना दिया है।
