संयुक्त अरब अमीरात पर बड़ा दावा: ईरान के लवान द्वीप पर गुप्त हमला, तेल रिफाइनरी निशाने पर

UAE Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) एक प्रमुख मोर्चे के रूप में उभरकर सामने आया है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूएई ने ईरान के हमलों का बदला लेने के लिए बेहद गुप्त तरीके से सैन्य कार्रवाई की है।

यूएई ने ईरान के तेल ठिकाने पर किया सीक्रेट स्ट्राइक
यूएई ने ईरान के तेल ठिकाने पर किया सीक्रेट स्ट्राइक

UAE Iran Conflict: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया संघर्ष के दौरान UAE ने बेहद गुप्त तरीके से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के लवान द्वीप पर एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे वहां भीषण आग लग गई और उत्पादन क्षमता कई महीनों के लिए प्रभावित हो गई।

हालांकि, UAE ने इन हमलों को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। दूसरी ओर, ईरान ने इस घटना को दुश्मन की कार्रवाई बताते हुए जवाबी कदम उठाए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके बाद यूएई और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।

बताया जा रहा है कि संघर्ष के दौरान यूएई को भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में हवाई यातायात प्रभावित हुआ, पर्यटन क्षेत्र पर दबाव बढ़ा और निवेश गतिविधियों में भी सुस्ती देखी गई। यही वजह रही कि अबू धाबी ने ईरान को सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सीधा सुरक्षा खतरा मानना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले UAE ईरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता था, लेकिन लगातार हमलों के बाद उसकी रणनीति बदल गई। इसके बाद यूएई ने ईरान से जुड़े कुछ संस्थानों पर सख्ती बढ़ाई, वीजा नियम कड़े किए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने के प्रयासों का समर्थन किया।

वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस पूरे घटनाक्रम पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सभी विकल्प खुले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वॉशिंगटन ने खाड़ी देशों के ईरान विरोधी रुख पर खुली नाराजगी नहीं दिखाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में बड़ा मोड़ हो सकता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि खाड़ी देश अब ईरान के प्रति पहले से अधिक आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों पर पड़ सकता है।

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