ओमान तट पर अमेरिकी हमले में 2 भारतीय नाविकों की मौत, चीफ इंजीनियर अब भी लापता

ओमान के तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का शिकार बने भारतीय नाविकों की पहचान सामने आ गई है। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) के महासचिव मनोज यादव ने पुष्टि की है कि हमले के दौरान ऑयल टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर सवार दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य चालक दल का सदस्य अब भी लापता है।

ओमान के तट के पास अमेरिकी नौसेना (यूएस नेवी) द्वारा एक वाणिज्यिक तेल टैंकर (ऑयल टैंकर) पर किए गए हमले में बड़ा और दुखद खुलासा हुआ है। इस हमले का शिकार बने भारतीय नाविकों की आधिकारिक पहचान कर ली गई है। ‘फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (FSUI) के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने पुष्टि की है कि अमेरिकी हमले के वक्त ‘सेट्टेबेलो’ (Settebello) नामक तेल टैंकर पर सवार दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जबकि जहाज के चीफ इंजीनियर अभी भी लापता हैं। बुधवार को हुए इस हमले के बाद से ही नाविकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और वे सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

मारे गए नाविकों की हुई पहचान, चीफ इंजीनियर अब भी लापता

यूनियन और राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले दोनों जांबाज भारतीय नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है। वहीं, जहाज के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश हमले के बाद से ही समुद्र में लापता हैं। लापता चीफ इंजीनियर को तलाशने के लिए तटीय सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, हालांकि समय बीतने के साथ उनके बचने की उम्मीदें बेहद कम होती जा रही हैं। मृत नाविक आदित्य शर्मा के पिता ने रोते हुए भारत सरकार से अपने बेटे के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वतन वापस लाने की भावुक अपील की है।

जहाज पर सवार थे 24 भारतीय क्रू मेंबर

ओमान के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर जिस कमर्शियल पोत को अमेरिकी नौसेना ने निशाना बनाया, उस पर कुल 24 भारतीय चालक दल (क्रू मेंबर्स) के सदस्य सवार थे। हमले के तुरंत बाद शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित समुद्र से बाहर निकाल लिया गया था, जबकि 3 नाविक लापता हो गए थे। बाद में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान दो नाविकों के शव बरामद किए गए।

भारत सरकार ने जताई कड़ी नाराजगी

भारतीय नागरिकों की मौत से भड़के भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक (डिप्लोमैट) को तलब कर एक सख्त विरोध पत्र (डीमार्श) सौंपा है। भारत सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि क्षेत्र में शांतिपूर्ण वाणिज्यिक जहाजों पर होने वाले ये हमले बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य हैं। भारत ने दोटूक लहजे में कहा कि वैश्विक व्यापार में लगे वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अमेरिकी नौसेना की सफाई

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नाकेबंदी कर के बैठी अमेरिकी नौसेना ने इस घातक हमले पर अपनी सफाई पेश की है। अमेरिकी नौसेना के केंद्रीय कमान (CENTCOM) का कहना है कि ओमान की खाड़ी से गुजरते समय व्यापारिक जहाज ‘सेट्टेबेलो’ को रुकने का इशारा किया गया था, लेकिन जहाज के कैप्टन ने अमेरिकी सेना के निर्देशों का बार-बार उल्लंघन किया। निर्देश न मानने पर अमेरिकी फाइटर जेट ने आत्मरक्षा और नाकेबंदी के नियमों के तहत जहाज़ के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए सटीक दूरी से मिसाइलें दागीं, जिससे इंजन रूम पूरी तरह नष्ट हो गया।

अमेरिकी नौसेना ने यह भी बताया कि 13 अप्रैल को क्षेत्र में नाकेबंदी लागू होने के बाद से अब तक सेंटकॉम की सेनाओं ने नियमों का उल्लंघन करने वाले आठ संदिग्ध जहाजों को रोका है। चिंता की बात यह है कि पिछले 24 घंटों के भीतर भारतीय क्रू (चालक दल) वाले किसी जहाज पर अमेरिकी नौसेना का यह लगातार दूसरा बड़ा हमला है, जिसने भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में भी तनाव बढ़ा दिया है।

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