मिडिल ईस्ट में शांति बहाली की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को अचानक रद्द कर दिया है। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका वर्तमान में फायदे की स्थिति में है और यदि ईरान को बातचीत करनी है, तो वह खुद फोन करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने प्रतिनिधियों को 18 घंटे की लंबी उड़ान भरकर ऐसी चर्चा के लिए नहीं भेजना चाहते जो बेकार की बातों में खत्म हो जाए।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ और फॉक्स न्यूज के जरिए इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व इस समय जबरदस्त अंदरूनी कलह और भ्रम का शिकार है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं, जबकि ईरान के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। उनके अनुसार, कूटनीतिक समय बर्बाद करने के बजाय अब गेंद ईरान के पाले में है। गौरतलब है कि इससे पहले पहले दौर की वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था, जो 1979 की क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्च स्तरीय सीधी बातचीत थी, लेकिन वह भी बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी।
दूसरी ओर, ईरान ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद तेहरान के रुख को स्पष्ट किया। ईरान का कहना है कि वह अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगों’ के आगे नहीं झुकेगा। तेहरान ने अमेरिका पर भरोसा करने से इनकार करते हुए तर्क दिया कि पिछली वार्ताओं के बावजूद अमेरिका और इजरायल ने उन पर हमले किए हैं। ईरान अब केवल पाकिस्तान के माध्यम से परोक्ष (इनडायरेक्ट) बातचीत के पक्ष में है और उसने सीधी वार्ता की संभावनाओं को फिलहाल टाल दिया है।
इस राजनीतिक गतिरोध का असर जमीन पर भी साफ दिख रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच अनिश्चितकालीन सीजफायर लागू है, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है। ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रखी है, वहीं ईरान ने हाल ही में तीन जहाजों को निशाना बनाया है, जिनमें से एक भारत आ रहा था। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की इस नाकाबंदी और जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन, गैस और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। ट्रंप के इस ताजा फैसले ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को एक बार फिर अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है।
