फ्लोरिडा: अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के नेता चैंडलर लैंगविन इन दिनों अपनी विवादित टिप्पणी को लेकर कड़ी आलोचना का सामना कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को डिपोर्ट करने की बात कही थी। इस बयान के बाद शनिवार, 18 अक्टूबर को सिटी काउंसिल ने उन्हें फटकार लगाते हुए कई प्रतिबंध लगाए हैं। अब लैंगविन किसी भी विषय को एजेंडे में शामिल करने से पहले आम सहमति बनाएंगे, साथ ही उन्हें समितियों से हटा दिया गया है और अन्य आयुक्तों पर टिप्पणी करने से भी रोक दिया गया है।
सोशल मीडिया पर लैंगविन की पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिसमें उन्होंने लिखा था — “एक भी भारतीय ऐसा नहीं है जो अमेरिका की परवाह करता हो। वे यहां सिर्फ आर्थिक फायदा उठाने और भारत को समृद्ध बनाने के लिए हैं। अमेरिका, अमेरिकियों के लिए है।” इस टिप्पणी के बाद भारतीय समुदाय और अमेरिकी नेताओं ने उनकी निंदा की।
इसके अलावा, एक अन्य पोस्ट में उन्होंने भारतीयों पर अमेरिका का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया। यह विवाद तब और बढ़ गया जब भारत में जन्मे एक व्यक्ति हरजिंदर सिंह के खिलाफ फ्लोरिडा में सड़क हादसे के मामले में हत्या का आरोप लगा। लैंगविन ने इस घटना को भारतीयों के खिलाफ टिप्पणी करने का आधार बनाया।
दरअसल, 2 अक्टूबर को अपने जन्मदिन पर लिखे एक पोस्ट में लैंगविन ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की थी कि वे सभी भारतीयों के वीज़ा रद्द कर दें और उन्हें देश से बाहर निकाल दें। उन्होंने लिखा — “आज मेरा जन्मदिन है, और मेरी बस यही इच्छा है कि ट्रंप सभी भारतीयों के वीज़ा रद्द कर दें।”
Councilman Langevin out here saying what has needed to be said for generations. Our parents generation handed over our Republic without a fight to globalist interest, but they haven’t dealt with our generation.
— White River (@WhiteRecall) October 18, 2025
We The People are going to take it back by blood or by fire. pic.twitter.com/vLO9GIZV10
हालांकि, जब विवाद बढ़ा तो चैंडलर लैंगविन ने सफाई दी कि उनकी टिप्पणी सिर्फ अस्थायी वीज़ा धारकों के लिए थी, न कि पूरे भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।
फिर भी, फ्लोरिडा की सिटी काउंसिल ने इसे असहनीय और भेदभावपूर्ण बयान माना है। इस घटना के बाद लैंगविन की राजनीतिक छवि को बड़ा झटका लगा है, जबकि भारतीय समुदाय ने कहा है कि ऐसी टिप्पणियाँ अमेरिका की विविधता और समानता की भावना के खिलाफ हैं।
