नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित होने वाली लवकुश रामलीला इस बार विवादों में घिर गई है। वजह है एक्ट्रेस पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका निभाने के लिए चुना जाना। इस फैसले के बाद विरोध और समर्थन, दोनों ही आवाजें तेज हो गई हैं।
बीजेपी के भीतर भी इस पर मतभेद सामने आए हैं। विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने पूनम पांडे का समर्थन करते हुए कहा कि किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि कलाकार का काम अभिनय करना है। वहीं दिल्ली बीजेपी के मीडिया प्रभारी और लवकुश रामलीला कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीण शंकर कपूर ने पूनम पांडे का विरोध किया है। उनका कहना है कि पूनम की छवि रामलीला जैसे धार्मिक मंच के अनुरूप नहीं है।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि रामलीला जैसे पवित्र मंच पर पूनम पांडे को जगह देना हिंदू आस्था के साथ खिलवाड़ है। संगठन ने आयोजकों से निर्णय वापस लेने की मांग की है।
हालांकि, लवकुश रामलीला कमेटी ने साफ कर दिया है कि पूनम पांडे ही मंदोदरी की भूमिका निभाएंगी। कमेटी के चेयरमैन अर्जुन कुमार का कहना है कि हर किसी को मौका मिलना चाहिए और उम्मीद है कि इस किरदार से पूनम पांडे की सोच भी बदलेगी। उन्होंने बताया कि इस बार 500 से अधिक कलाकार मंचन का हिस्सा होंगे और पूनम उनमें से सिर्फ एक कलाकार हैं।
रामलीला का आयोजन 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक होगा और मंदोदरी का किरदार 29 और 30 सितंबर को मंच पर आएगा। अब देखना होगा कि बढ़ते विरोध के बीच पूनम पांडे की एंट्री रामलीला मंच पर शांतिपूर्वक हो पाती है या विवाद और गहराता है।
