फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। बाबा नीम करोली के जीवन से प्रेरित इस फिल्म को दर्शकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी बीच फिल्म का एक भजन सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खास बात यह है कि इस भजन को बुंदेलखंड के नेत्रहीन लोक गायक सुनील लोधी ने अपनी आवाज दी है।
फिल्म के जिस गीत की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उसका नाम ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ है। पारंपरिक लोक अंदाज में गाए गए इस भजन में बुंदेलखंड की मिट्टी और वहां की लोक-संगीत परंपरा की झलक सुनाई देती है। गीत की सादगी और सुनील लोधी की आवाज ने इसे श्रोताओं के बीच अलग पहचान दिलाई है।
सुनील लोधी के लिए यह गीत किसी बड़े मंच तक पहुंचने का मौका साबित हुआ है। वह इससे पहले अपने इलाके में तमूरा लेकर लोकगीत गाया करते थे। स्थानीय स्तर पर लोगों का मनोरंजन करने वाले सुनील अब अपनी आवाज के जरिए बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भजन के वायरल होने के बाद उनकी गायकी को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।
‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ की खासियत इसका लोक रंग है। इसमें किसी भव्य संगीत संयोजन के बजाय आवाज और भक्ति भाव को प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि गीत सुनने वाले कई लोग इसे फिल्म के दूसरे गानों से अलग मान रहे हैं। फिल्म की कहानी से जुड़े भावनात्मक पक्ष के साथ यह भजन दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है।
फिल्म ‘हनुमान अंश’ का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। बाबा नीम करोली से जुड़ी कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने वाली इस फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है। खासतौर पर फिल्म का धार्मिक और आध्यात्मिक पक्ष लोगों का ध्यान खींच रहा है।
कमाई की बात करें तो फिल्म ने शुरुआत में बॉक्स ऑफिस पर बहुत तेज रफ्तार नहीं पकड़ी थी। 31 जुलाई को सीमित संख्या में सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म की कमाई शुरुआती दौर में धीमी रही। रिलीज के तीन सप्ताह बाद तक इसका कलेक्शन करीब 10 करोड़ रुपये बताया गया था। हालांकि चौथे वीकेंड में फिल्म ने अचानक रफ्तार पकड़ी और इसकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिला।
फिल्म अब करीब 46 करोड़ रुपये के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन तक पहुंच चुकी है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ की चर्चा सिर्फ इसकी कहानी और बाबा नीम करोली से जुड़े विषय तक सीमित नहीं है। फिल्म का ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन भी इसकी लोकप्रियता का एक अहम हिस्सा बन गया है।
बुंदेलखंड के एक स्थानीय लोक गायक की आवाज का मुंबई के फिल्म स्टूडियो तक पहुंचना भी इस गीत की कहानी को खास बनाता है। सुनील लोधी के लिए यह भजन सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि उनकी वर्षों पुरानी लोकगायकी को बड़े मंच पर पहचान मिलने का अवसर भी बन गया है।
