गोरखपुर में कक्षा 4 में पढ़ने वाले 11 वर्षीय छात्र को लेकर एक मामला सामने आया है। परिजनों के मुताबिक, बच्चा लंबे समय से मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा था और धीरे-धीरे अश्लील सामग्री देखने का आदी हो गया। स्कूल में भी उसके व्यवहार को लेकर शिकायत सामने आई। इसके बाद प्रिंसिपल ने परिजनों को बुलाकर जानकारी दी और छात्र का नाम स्कूल से काट दिया। फिलहाल उसका इलाज और काउंसलिंग कराई जा रही है।
शाहपुर थाना क्षेत्र में रहने वाले दंपती का बेटा शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ता है। परिजनों के अनुसार, स्कूल की प्रिंसिपल ने उन्हें बुलाकर बताया कि छात्र के बैग से एक शिक्षक की अश्लील तस्वीर और उसके बनाए हुए स्केच मिले हैं। कक्षा के कुछ छात्रों ने भी उसके व्यवहार को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि बच्चा उनसे आपत्तिजनक बातें करता था।
ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बढ़ा मोबाइल का इस्तेमाल
परिजनों ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के समय बच्चों को मोबाइल देना शुरू किया गया था। इसके बाद छात्र धीरे-धीरे मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने लगा। वह अक्सर मोबाइल अपने पास रखने की जिद करता था और कई बार उसे लेकर बाथरूम में चला जाता था। परिजनों के मुताबिक, काफी समझाने और रोकने के बावजूद उसकी मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत कम नहीं हुई।
परिजनों ने यह भी बताया कि एक बार उन्होंने बच्चे को उसकी सात वर्षीय बहन के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। उस समय उसके मोबाइल पर अश्लील वीडियो चल रहा था। इसके बाद माता-पिता ने उसे समझाया और ऐसा दोबारा नहीं करने के लिए कहा। हालांकि, उनके मुताबिक मोबाइल से दूर रखने पर बच्चा चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता था।
मनोचिकित्सक से चल रहा इलाज
फिलहाल बच्चे का शाहपुर क्षेत्र के एक मनोचिकित्सक से इलाज कराया जा रहा है। शहर के मनोचिकित्सक अमित कुमार शाही के अनुसार, इस तरह की समस्या को बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं और बच्चों को मोबाइल से दूर रखना जरूरी है।
डॉक्टर के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे उम्र से पहले वयस्कों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इलाज और काउंसलिंग के जरिए बच्चे की स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
