बागपत: सरकारी तंत्र से निराश एक लापता किशोरी का पिता अब आमरण अनशन पर बैठ गया है। पुलिस या प्रशासन भले ही मदद करे या न करे, लेकिन स्थानीय समाज पूरी तरह उसके साथ खड़ा है। पिता अशोक शर्मा का कहना है कि उनकी 14 वर्षीय बेटी लापता है और पुलिस अब तक उसे ढूंढ नहीं पाई। लखनऊ में जनता दरबार में भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। उनका ऐलान है कि जब तक बेटी बरामद नहीं हो जाती, वह अनशन जारी रखेंगे, चाहे उन्हें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े।
घटना सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र के खिंदौड़ा गांव की है, जहां अशोक शर्मा की बेटी घर से निकलने के बाद लौटकर नहीं आई। उसने अपनी सहेली को फोन कर कहा था कि घर वालों को बता दे कि वह अब कभी वापस नहीं आएगी। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस अब तक लड़की को ढूंढने में नाकाम रही।
इस मामले को लेकर पीड़ित पिता ने सर्व समाज के साथ एसपी ऑफिस और कलेक्ट्रेट में कई बार धरना-प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आरोप है कि पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
गुस्से में ब्राह्मण समाज के लोगों ने गांव में सर्व समाज की महापंचायत बुलाने का ऐलान किया, जिसे पुलिस ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाकर और 15 दिन में लड़की बरामद करने का भरोसा देकर स्थगित करा दिया। लेकिन एक माह से ज्यादा बीत जाने के बाद भी कोई प्रगति न होने पर, 26 अगस्त से अशोक शर्मा ने अपने घर के बाहर टेंट लगाकर आमरण अनशन शुरू कर दिया।
ब्राह्मण समाज के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा भी उनके साथ अनशन पर बैठे हैं। लोगों का कहना है कि जनता दरबार से लेकर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान तक—सब सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं। वे तब तक अनशन जारी रखेंगे जब तक लड़की सुरक्षित वापस नहीं आ जाती।
