नई दिल्ली: ‘India AI Impact Summit 2026’ के मंच से भारत ने एक अभूतपूर्व वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। समिट के दौरान महज 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड संख्या में लोगों द्वारा ‘AI प्लेज’ (Artificial Intelligence शपथ) लेने के चलते भारत का नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज हो गया है। इस गौरवपूर्ण क्षण के साथ ही भारत ने तकनीक और जागरूकता के क्षेत्र में अपनी धमक पेश की है।
24 घंटे में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान निर्धारित 24 घंटे की अवधि में कुल 2,50,946 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से AI प्लेज ली। इस विशाल भागीदारी ने इसे एक विश्व रिकॉर्ड बना दिया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री के विजन को दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शपथ का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को एआई तकनीक के प्रति जागरूक करना है। सरकार ने इस अभियान में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों के लिए विशेष ‘ऑनलाइन बैज’ देने का भी ऐलान किया था।
डिजिटल माध्यम से जुड़ी जनता
इस रिकॉर्ड को सफल बनाने के लिए सरकार ने ‘AI इम्पैक्ट पोर्टल’ पर एक समर्पित माइक्रोसाइट तैयार की थी। सोमवार सुबह से शुरू होकर मंगलवार सुबह तक चले इस अभियान में लोगों ने अपने स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर के जरिए हिस्सा लिया। शपथ लेने की प्रक्रिया के बाद प्रतिभागियों के लिए एक क्विज का आयोजन किया गया, जिसे पूरा करने पर उन्हें आधिकारिक बैज प्रदान किए गए।
IndiaAI and Intel India earn GUINNESS WORLD RECORDS for most pledges received for an AI responsibility campaign in 24 hours. 🇮🇳 pic.twitter.com/kgyWhCt6eU
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 18, 2026
ग्लोबल निवेश और समिट का विस्तार
भारत में चल रहे इस भव्य आयोजन की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसे एक दिन और बढ़ाने का फैसला किया है। अब यह समिट 21 फरवरी तक जारी रहेगा। इस कार्यक्रम में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के सीईओ शामिल हुए हैं। इन कंपनियों ने भारत में एआई और डेटा सेंटर्स की स्थापना को लेकर बड़े निवेश की घोषणाएं की हैं, जो भविष्य में भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करेंगी।
रोबो डॉग और यूनिवर्सिटी विवाद
सफलता के बीच यह समिट एक विवाद के कारण भी चर्चा में रहा। ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक ‘चाइनीज रोबोट’ (रोबो डॉग) को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे। आरोप लगे कि यूनिवर्सिटी ने रोबोट को खुद के आविष्कार के तौर पर पेश करने के फर्जी दावे किए हैं। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया था। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को भारत मंडपम में आवंटित की गई जगह को खाली करने का आदेश दे दिया गया।
