नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने से पहले Amazon और Flipkart ने अपने प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वाले सेलर्स के लिए फीस और पेनल्टी से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऑर्डर कैंसिल करने या तय समय पर डिस्पैच नहीं करने की स्थिति में विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इन बदलावों का असर खास तौर पर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है, जो सीमित मार्जिन पर ऑनलाइन बिक्री करते हैं।
Amazon ने Easy Ship और Self Ship सेलर्स के लिए कैंसिलेशन फीस की गणना का तरीका बदल दिया है। यह व्यवस्था 17 अगस्त 2026 से लागू हो चुकी है। पहले कैंसिलेशन चार्ज अलग-अलग कैटेगरी और रेफरल फीस से जुड़ा होता था, जबकि अब ऑर्डर की कीमत के आधार पर शुल्क तय होगा।
10,000 रुपये से कम कीमत वाले ऑर्डर को सेलर की ओर से कैंसिल करने पर 10 प्रतिशत फीस लगेगी। 10,001 से 50,000 रुपये के ऑर्डर के लिए यह शुल्क 8 प्रतिशत, 50,001 से 1 लाख रुपये तक के ऑर्डर पर 5 प्रतिशत और 1 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले ऑर्डर पर 2 प्रतिशत होगा। इस शुल्क पर 18 प्रतिशत GST भी लगेगा। हालांकि, खरीदार अपनी तरफ से ऑर्डर कैंसिल करता है तो इस नियम के तहत सेलर से कैंसिलेशन फीस नहीं ली जाएगी। वहीं, सेलर तय समय में सामान भेजकर उसकी पुष्टि नहीं करता और ऑर्डर अपने आप कैंसिल हो जाता है, तो उस स्थिति में भी शुल्क लगाया जा सकता है।
Amazon ने क्लोजिंग फीस में बदलाव की भी घोषणा की है। 7 सितंबर 2026 से 500 रुपये तक के प्रोडक्ट पर क्लोजिंग फीस 1 रुपये बढ़ाई जाएगी, जबकि 500 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर इसमें 3 रुपये की बढ़ोतरी होगी। यह बदलाव फुलफिलमेंट सेंटर, Easy Ship और Seller Flex जैसे चैनलों पर लागू होगा। कंपनी ने इसके पीछे ईंधन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत बढ़ने का कारण बताया है।
Flipkart ने भी सेलर्स के लिए ऑर्डर पूरा करने से जुड़े नियमों को कड़ा किया है। 23 अगस्त 2026 से लागू व्यवस्था के मुताबिक, अगर विक्रेता तय Dispatch By Date तक सामान Flipkart के लॉजिस्टिक्स पार्टनर को नहीं सौंपता है, तो प्रति शिपमेंट 30 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। ऑर्डर मिलने के बाद सेलर की तरफ से कैंसिल किए जाने पर 60 रुपये की पेनल्टी होगी। अगर डिस्पैच की तय समयसीमा निकलने के बाद ऑर्डर कैंसिल किया जाता है, तो जुर्माना 90 रुपये तक पहुंच सकता है।
नियमों में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब फेस्टिव सीजन में Amazon और Flipkart पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। छोटे कारोबारियों की चिंता यह है कि हर कैंसिलेशन या देरी उनके नियंत्रण की वजह से नहीं होती। पिकअप में देरी, लॉजिस्टिक्स संबंधी परेशानी या स्टॉक की समस्या जैसी परिस्थितियों में भी ऑर्डर प्रभावित हो सकता है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त शुल्क और पेनल्टी उनकी लागत बढ़ा सकती है।
Amazon का कहना है कि बदलाव का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर और भरोसेमंद डिलीवरी अनुभव देना है। कंपनी के मुताबिक, सेलर की ओर से होने वाले कैंसिलेशन Amazon.in पर कुल ऑर्डर्स के 1 प्रतिशत से भी कम हैं। कंपनी ने यह भी कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में सेलर्स के लिए उन मामलों से सुरक्षा के उपाय मौजूद हैं, जो उनके नियंत्रण से बाहर होते हैं।
इन नियमों का तत्काल सीधा असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि फीस और पेनल्टी सेलर्स से संबंधित हैं। हालांकि, आगे चलकर कारोबारी अगर बढ़ी हुई लागत को अपनी कीमतों में शामिल करते हैं तो कुछ सामान की कीमत, मिलने वाले डिस्काउंट या उपलब्धता पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
फेस्टिव सीजन में बढ़ने वाले ऑर्डर्स के बीच सेलर्स के सामने अब स्टॉक और समय पर डिस्पैच सुनिश्चित करने की अतिरिक्त चुनौती होगी। वहीं, ग्राहकों के लिए इन बदलावों का वास्तविक असर कितना दिखाई देगा, यह आने वाली फेस्टिव सेल के दौरान ही स्पष्ट होगा।
