हिंदू पंचांग का पांचवा महीना ‘सावन’ (श्रावण) धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद पवित्र और भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में शिव जी की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और सोमवार के व्रत रखने की परंपरा है। मानसून की बारिश से प्रकृति के हरे-भरे होने के साथ ही यह महीना उत्सव और भक्ति का माहौल लेकर आता है।
सावन 2026 कब से शुरू हो रहा है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का महीना 29 जुलाई 2026 (बुधवार) से शुरू हो रहा है। इस पवित्र महीने का समापन 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबंधन के दिन होगा।
सावन 2026 सोमवार व्रत की तिथियां
उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार, इस साल सावन में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं:
- पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
- चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026
सावन का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। इसी महीने में समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था, तभी से सावन में शिव जी के जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है। इस महीने लाखों कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर लाते हैं और पैदल यात्रा कर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
सावन सोमवार की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद क्रमशः दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें और अंत में फिर से शुद्ध जल अर्पित करें।
शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं और बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, सफेद फूल तथा शमी के पत्ते चढ़ाएं। इसके साथ ही माता पार्वती को सिंदूर और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर “ऊं नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करें या सुनें और अंत में शिव जी की आरती करें।
