Pradosh Vrat 2026: मई में गुरु प्रदोष व्रत कब है? जानें 14 या 15 मई सही तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

Guru Pradosh Vrat 2026: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि, शांति और मनचाहा फल प्राप्त होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत 2026 (Image: ChatGPT)
गुरु प्रदोष व्रत 2026 (Image: ChatGPT)

Guru Pradosh Vrat 2026: हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें सुख-समृद्धि, शांति और मनचाहा फल प्राप्त होता है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। ऐसे में मई 2026 में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की तिथि को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।

प्रदोष व्रत 2026 की सही तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए ज्येष्ठ महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में संध्या समय यानी प्रदोष काल का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार 14 मई को प्रदोष काल शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ और फलदायी माना गया है।

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के पश्चात भगवान शिव के सम्मुख व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करें। पूजा में भोलेनाथ को 11 या 21 बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और ऋतु फल अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ करना इस दिन विशेष ऊर्जा प्रदान करता है।

शाम के समय प्रदोष काल शुरू होने से पहले पुनः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और विधि-विधान से शिव परिवार की पूजा करें। घी के दीपक से आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। इस दिन शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

महत्व और मिलने वाले लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत और पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है, बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हों या वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना हो, उनके लिए प्रदोष व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है।

गुरुवार के दिन पड़ने वाला यह प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की कृपा भी दिलाने वाला माना जाता है। इसलिए मई 2026 का यह गुरु प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

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