पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आर्थिक सावधानी बरतने की एक विशेष अपील की है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत जैसे देशों पर आर्थिक दबाव बना सकते हैं, और इस स्थिति से निपटने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और फिजूलखर्ची रोकने के लिए चार मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है।
पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग का आह्वान
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल कम करने और जरूरत के हिसाब से ही करने की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग छोटी दूरियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV), कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का अधिक से अधिक उपयोग करें। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ डालता है और महंगाई को बढ़ावा देता है। ईंधन की खपत में कमी लाना देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
భారతదేశం అభివృద్ధిలో కొత్త శిఖరాలను అధిరోహిస్తూనే ఉంది. అయితే అదే సమయంలో మనం అధిగమించాల్సిన ఎన్నో సవాళ్లు కూడా ఉన్నాయి.
— Narendra Modi (@narendramodi) May 10, 2026
ఈ సందర్భంగా తోటి భారతీయులకు ఇదే నా విజ్ఞప్తి. pic.twitter.com/tggpC1i6OB
सोना खरीदने से बचने की सलाह
पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि यदि बहुत आवश्यक न हो, तो कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें। भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण आयातकों में से एक है और सोने के आयात के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि त्योहारों और शादियों के सीजन में होने वाली सोने की भारी खरीद विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाती है। यदि लोग सोने की खरीद को कुछ समय के लिए टाल दें, तो उस विदेशी मुद्रा का उपयोग कच्चे तेल और गैस जैसी अनिवार्य वस्तुओं के आयात के लिए किया जा सकेगा।
विदेश यात्रा टालने की अपील
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को फिलहाल टालने का अनुरोध किया है। विदेश यात्रा के दौरान बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है, जिससे घरेलू संसाधनों पर असर पड़ता है। पीएम मोदी ने लोगों को सुझाव दिया कि वे ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाते हुए घरेलू पर्यटन और विकल्पों को प्राथमिकता दें। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि देश के भीतर ही आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
भोजन की बर्बादी रोकने पर जोर
आर्थिक संसाधनों के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने सामाजिक जिम्मेदारी के तहत खाने की बर्बादी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जितनी भूख हो, उतना ही भोजन थाली में लें। अन्न की बर्बादी रोकना न केवल नैतिक रूप से सही है, बल्कि यह देश के खाद्य संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए भी आवश्यक है।
विदेशी मुद्रा भंडार का महत्व
सरकार की इन अपीलों के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को मजबूत बनाए रखना है। डॉलर और यूरो जैसी विदेशी मुद्राएं देश की वह ताकत हैं, जिससे कच्चा तेल, गैस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आवश्यक सामानों का भुगतान किया जाता है। युद्ध या वैश्विक तनाव के समय, यदि आयात की कीमतें अचानक बढ़ जाएं, तो यही भंडार देश को आर्थिक झटके झेलने और रुपये की कीमत को स्थिर रखने में मदद करता है। प्रधानमंत्री की यह अपील नागरिकों को देश की आर्थिक लड़ाई में भागीदार बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
