NEET UG 2026 Re-Test: नीट अंडरग्रेजुएट (NEET UG) परीक्षा में पेपर लीक की घटनाओं को पूरी तरह रोकने और परीक्षा की शुचिता बहाल करने के लिए केंद्र सरकार ने इस बार बेहद सख्त और अभूतपूर्व सुरक्षा रणनीति तैयार की है। इक्कीस जून को होने वाले री-टेस्ट के लिए प्रश्न पत्रों को सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के विमानों का इस्तेमाल करने पर बेहद गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह कदम सरकार की उस व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, खुफिया एजेंसियां और राज्यों का पूरा पुलिस नेटवर्क एक साथ मिलकर काम कर रहा है। हाल ही में नीट पेपर लीक को लेकर हुए भारी विवाद के बाद अब आगामी री-टेस्ट की तैयारियों पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पैनी नजर बनाए हुए हैं और इसकी नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
इस पूरी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को एक अत्यंत उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह और कई प्रमुख मंत्रालयों के शीर्ष नौकरशाह शामिल हुए।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चूंकि परीक्षा के आयोजन में समय बहुत कम बचा है और सरकार इस बार किसी भी स्तर पर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती, इसलिए वायुसेना को केवल परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के प्रबंधन के लिए तैनात करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि इस योजना पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है और औपचारिक मंजूरी के लिए इस पूरे प्रस्ताव को जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यह कदम दर्शाता है कि सरकार उन सॉल्वर गैंग और असामाजिक तत्वों के बदलते तौर-तरीकों को लेकर कितनी सतर्क है जो देश की इस प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक करने की ताक में रहते हैं।
अगर भारतीय वायुसेना की इस विशेष योजना को हरी झंडी मिलती है, तो वायुसेना के सैन्य विमान आगामी नीट परीक्षा के संवेदनशील प्रश्न पत्रों को देश के विभिन्न राज्यों में तय किए गए चुनिंदा हब या मुख्य केंद्रों तक हवाई मार्ग से पहुंचाएंगे। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में लखनऊ, आगरा, गोरखपुर और वाराणसी; बिहार में पटना और दरभंगा; तथा पश्चिम बंगाल में कोलकाता और बागडोगरा जैसे प्रमुख शहरों को इसके लिए चुना गया है। इन मुख्य हवाई केंद्रों पर प्रश्न पत्र पहुंचने के बाद संबंधित राज्यों की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल उन पेपरों को विभिन्न जिलों तक सुरक्षित ले जाने, उन्हें कड़ी निगरानी वाले स्ट्रॉन्ग रूम में रखने और अंततः परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो अब तक इन गोपनीय प्रश्न पत्रों को देश भर में पहुंचाने का काम डाक विभाग (इंडिया पोस्ट) के नेटवर्क के जरिए किया जाता रहा है।
इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया के हर एक चरण की बेहद बारीक और विस्तृत समीक्षा की है। इसमें प्रश्न पत्र सेट करने वाले विशेषज्ञों के चयन और उनकी गोपनीयता से लेकर, छपाई (प्रिंटिंग) के कड़े प्रोटोकॉल, परिवहन के रूट, भंडारण (स्टोरेज) की सुविधाओं, वितरण नेटवर्क और परीक्षा केंद्रों पर अंतिम समय की सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल थीं।
वायुसेना के विमानों के उपयोग के अलावा इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यों के गृह विभागों के बीच एक अचूक समन्वय स्थापित किया जाए ताकि प्रश्न पत्रों की आवाजाही पर सेटेलाइट और डिजिटल माध्यमों से भी नजर रखी जा सके। इस बार जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की इकाइयों को प्रश्न पत्रों की सुरक्षा और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक डिलीवर करने की पूरी प्रक्रिया में सीधे तौर पर जवाबदेह बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि बारह मई को आयोजित हुई नीट-यूजी दो हजार छब्बीस की परीक्षा को प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोपों और शुरुआती सबूतों के बाद पूरी तरह रद्द कर दिया गया था। इस मामले की कमान संभाल रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अब तक देश के अलग-अलग शहरों से इस रैकेट में शामिल तेरह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसी कड़वे अनुभव से सबक लेते हुए सरकार अब फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है ताकि इक्कीस जून को देश के लाखों परीक्षार्थी पूरी पारदर्शिता और बिना किसी मानसिक तनाव के इस परीक्षा में शामिल हो सकें।
