पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची भगदड़ और आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा पारिवारिक और कानूनी झटका लगा है। ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ नेताओं में शुमार सेरामपुर के सांसद व वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कथित जाली हस्ताक्षर के एक मामले में ममता के भतीजे और टीएमसी के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। यही नहीं, उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उनकी वजह से पार्टी पूरी तरह बर्बाद हो गई है, लेकिन उनका घमंड अब भी वैसा ही है।
यह हाई-प्रोफाइल ड्रामा गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में उस समय सामने आया, जब कल्याण बनर्जी को कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की तरफ से पैरवी करनी थी। सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले सेरामपुर के सांसद ने खुद को इस केस से पूरी तरह अलग कर लिया। कल्याण बनर्जी के इस कड़े कदम के बाद अब वकील अयान भट्टाचार्य कोर्ट में अभिषेक का पक्ष रख रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ कल्याण बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनके बेटे शीर्षन्या बनर्जी और उनके अधीन काम करने वाले सभी जूनियर वकीलों ने भी एक साथ अभिषेक बनर्जी के इस केस से दूरी बना ली है।
किस बात से आहत हुए कल्याण बनर्जी?
‘आनंदबाजार पत्रिका’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अप्रत्याशित कदम के पीछे की वजह बताते हुए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अपने दिल का गुबार निकाला। उन्होंने कहा, “हां, मैंने उनका केस छोड़ दिया है। बुधवार को मैंने खुद हाई कोर्ट में उनके केस का विशेष रूप से उल्लेख किया था और जस्टिस कौशिक चंदा के समक्ष ममता बनर्जी के आवास पर सीआईडी (CID) के जाने का बेहद संवेदनशील मुद्दा भी पूरी मजबूती से उठाया था। किसी तकनीकी वजह से कोर्ट ने कल अभिषेक के केस पर सुनवाई नहीं की थी, जबकि हमने जज से इसे ‘अर्जेंट बेसिस’ (आपातकालीन आधार) पर सुनने की गुजारिश की थी, जिसके बाद आज इस केस की सुनवाई तय हुई थी।”
अभिषेक बनर्जी की ‘बदतमीजी’ पर बिफरे, टीएमसी छोड़ने के दिए संकेत
अभिषेक बनर्जी के व्यवहार से बेहद आहत कल्याण बनर्जी ने आगे बताया, “कल रात करीब 12:30 बजे मेरे बेटे के पास एक फोन आया। फोन पर उसे सूचित किया गया कि अब अयान भट्टाचार्य यह केस लड़ेंगे, जो जूनियर्स में भी जूनियर हैं। यह बात सुनते ही मैंने साफ कह दिया कि अब मैं अभिषेक बनर्जी के साथ किसी भी कीमत पर नहीं रहूंगा। मैं पिछले 45 साल से वकालत के इस सम्मानित पेशे में हूं, मैं इस तरह की बदतमीजी और अपमान बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।”
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को कल्याण बनर्जी द्वारा टीएमसी छोड़ने के सीधे संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी सुप्रीमो को अल्टीमेटम देते हुए कहा, “मैं ममता बनर्जी से स्पष्ट रूप से कहूंगा कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। या तो वे पार्टी में अभिषेक बनर्जी को रखें और हमें जाने दें, या फिर हमें सम्मान के साथ रखें और अभिषेक को उनके पद से हटाएं।”
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कल्याण बनर्जी ने दोटूक कहा कि अभिषेक बनर्जी के अहंकार और गलत फैसलों के कारण ही आज तृणमूल कांग्रेस विनाश की कगार पर आकर खड़ी हो गई है, लेकिन इसके बावजूद उनके रवैये में कोई शालीनता या सुधार नहीं आया है। एक तरफ जहां संसद में टीएमसी के 20 लोकसभा और कई राज्यसभा सांसद बगावत पर उतर आए हैं, वहीं घर के सबसे पुराने सिपहसालार कल्याण बनर्जी के इस विद्रोह ने ममता बनर्जी की राजनीतिक राह को बेहद कांटों भरा बना दिया है।
