INDIA Bloc Meeting: सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की गर्मजोशी से मुलाकात, सियासी संदेशों की चर्चा तेज

देश की राजधानी दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन ‘INDIA ब्लॉक’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 23 राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा करना और सत्तारूढ़ एनडीए के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना था।

देश की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच देश की राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा करना और सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के खिलाफ एक साझा व प्रभावी रणनीति तैयार करना था। इस रणनीतिक बैठक में कुल 23 राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ मिलकर आवाज उठाने का संकल्प लिया।

बैठक में शामिल हुए विपक्षी खेमे के बड़े चेहरे

इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद कपिल सिब्बल और डेरेक ओ’ब्रायन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर इस बैठक में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। बैठक की शुरुआत में एक बेहद खास पल तब देखने को मिला जब सोनिया गांधी और ममता बनर्जी ने एक-दूसरे से मुलाकात की, गले मिलकर अभिवादन किया और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का कुशलक्षेम जाना।

इन तीन प्रमुख दलों की रही अनुपस्थिति

इस बैठक में विपक्षी खेमे के तीन प्रमुख घटक दल—तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके (एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली), आम आदमी पार्टी (अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली) और अभिनेता थलपति विजय की राजनीतिक पार्टी टीवीके शामिल नहीं हुए। हालांकि, इन तीनों ही दलों ने बैठक में हिस्सा न लेने के कारणों के बारे में गठबंधन को पहले ही सूचित कर दिया था।

परिसीमन विधेयक पर जीत का जिक्र, मल्लिकार्जुन खरगे का सरकार पर बड़ा हमला

बैठक को संबोधित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी एकजुटता की सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल ही में 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में समूचे विपक्ष ने जिस असाधारण एकता का प्रदर्शन किया था, वह बेहद निर्णायक था। उसी एकजुटता के बल पर विपक्ष ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर लाए गए सरकार के विधेयकों को परास्त करने में सफलता हासिल की थी। खरगे ने जोर देकर कहा कि देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को अक्षुण्ण रखने और शासन से जुड़ी राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और विदेश नीति की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए इस आपसी तालमेल को भविष्य में और अधिक मजबूत करना होगा।

विपक्ष ने उठाए बुनियादी अधिकार, महंगाई और रोजगार से जुड़े मुद्दे

कांग्रेस अध्यक्ष ने विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एसआईआर (SIR) जैसी नीतियों के कारण देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, साथ ही गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।

आर्थिक मोर्चे पर चिंता जताते हुए खरगे ने कहा कि बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता त्रस्त है। देश का आर्थिक परिदृश्य नकारात्मक हो रहा है और रोजगार सृजन के लिए जिस गति से नए निवेश की आवश्यकता है, वह धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कतिपय क्षेत्रों में बढ़ते निजी एकाधिकार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) के सामने खड़े संकट का भी उल्लेख किया।

युवाओं और सामाजिक सरोकारों की बात करते हुए विपक्ष ने कहा कि देश की मौजूदा परीक्षा प्रणाली में कुप्रबंधन के चलते लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। विशेष रूप से बीजेपी शासित राज्यों में समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए बैठक में कहा गया कि भारत की पारंपरिक कूटनीति के मूल्यों के साथ समझौता किया जा रहा है, जिन पर देश लंबे समय से मजबूती से खड़ा रहा है।

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