CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी: सिस्टम पर हमला करने वालों को बताया ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’, वकीलों की डिग्री पर उठाए सवाल

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी शुक्रवार को अदालत में सुनवाई के दौरान चर्चा का विषय बन गई। एक वकील द्वारा सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने की मांग पर सुनवाई करते हुए CJI ने बेरोजगार युवाओं और कुछ एक्टिविस्टों को लेकर तीखी टिप्पणी की।

CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों ने कानूनी और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई ने बेहद सख्त भाषा का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्होंने सिस्टम पर हमला करने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की।

यह पूरा मामला एक वकील द्वारा खुद को ‘सीनियर एडवोकेट’ का दर्जा दिलाने के लिए दायर की गई याचिका से जुड़ा था। भारतीय कानूनी व्यवस्था में ‘सीनियर एडवोकेट’ का पद अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है, जो किसी वकील को उसके लंबे अनुभव, कानूनी ज्ञान और उच्च पेशेवर आचरण के आधार पर अदालत द्वारा स्वयं प्रदान किया जाता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की तल्ख टिप्पणियाँ

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ उस समय नाराज हो गई जब उन्होंने याचिकाकर्ता वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनकी भाषा का अवलोकन किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा कोई ऐसा ‘मेडल’ नहीं है जिसे मांगकर हासिल किया जाए या सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाए। बेंच ने यहां तक कहा कि यदि दिल्ली हाई कोर्ट ऐसा दर्जा दे भी देता, तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द करने में संकोच नहीं करता।

‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ संबोधन पर विवाद

सुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा सीजेआई की उस टिप्पणी की हो रही है जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाज में कुछ ऐसे ‘परजीवी’ हैं जो सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई बेरोजगार युवा, जिन्हें पेशे में जगह नहीं मिलती, वे मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट बन जाते हैं और संस्थानों पर हमले शुरू कर देते हैं। सीजेआई ने ऐसे लोगों को ‘कॉकरोच’ की संज्ञा देते हुए याचिकाकर्ता वकील से पूछा कि क्या वह भी इसी श्रेणी में शामिल होना चाहते हैं।

वकीलों की डिग्री और बार काउंसिल पर सवाल

CJI ने केवल याचिकाओं तक ही सीमित न रहकर वकालत के पेशे की मौजूदा स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी संख्या में वकीलों की डिग्रियों की प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाते हुए कहा कि परिषद शायद ही कभी ऐसे कठोर कदम उठाएगी क्योंकि उन्हें वकीलों के ‘वोट’ की चिंता रहती है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale