भारतीय जनता पार्टी ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे किसी भी मौजूदा सांसद को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसी फैसले के बाद पार्टी और केंद्र सरकार में संभावित बदलावों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सबसे अधिक ध्यान इस बात ने खींचा कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा के लिए फिर से नामित नहीं किया गया। दोनों वर्तमान में क्रमशः राजस्थान और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य और केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
संगठन और सरकार के बीच संतुलन की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस वजह से भी बढ़ी है क्योंकि केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कुछ अन्य सदस्य पहले ही संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई है, जबकि हर्ष मल्होत्रा हाल ही में दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए हैं। इससे संगठन और सरकार के बीच नई जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।
नए चेहरों को प्राथमिकता
पार्टी ने इस बार संगठन से जुड़े कई नेताओं को पहली बार राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया को उम्मीदवार बनाया गया है।
गुजरात में भी पार्टी ने चार नए चेहरों पर भरोसा जताया है। इनमें राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं। पार्टी इन नियुक्तियों के जरिए ओबीसी और आदिवासी समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
झारखंड और कर्नाटक पर नजर
भाजपा ने अभी झारखंड और कर्नाटक की एक-एक राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। इसी वजह से यह संभावना बनी हुई है कि पार्टी बाद के चरण में कुछ वरिष्ठ नेताओं या मंत्रियों को इन सीटों से मौका दे सकती है।
पंजाब और केरल की राजनीतिक गणित
पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर फोकस किया है। हाल ही में जाट सिख समुदाय से आने वाले केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि अब तरुण चुघ को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश की है।
वहीं, रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार न बनाए जाने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर पैदा की है। माना जा रहा है कि उन्हें भविष्य की चुनावी रणनीति में अलग भूमिका दी जा सकती है।
केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन को भी सूची में जगह नहीं मिली। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
कई राज्यों में जीत लगभग तय
राज्यसभा चुनाव में जिन राज्यों से भाजपा ने उम्मीदवार उतारे हैं, वहां उसकी मजबूत संख्या के कारण अधिकांश सीटों पर जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में पार्टी सरकार में है और उसे पर्याप्त समर्थन हासिल है।
इसके अलावा ओडिशा की उपचुनाव सीट के लिए पार्टी ने देबाशीष सामंतराय को मैदान में उतारा है, जिन्होंने हाल ही में बीजेडी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।
राज्यसभा उम्मीदवारों की इस सूची ने केवल चुनावी समीकरण ही नहीं बदले हैं, बल्कि संगठन और सरकार में संभावित बदलावों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं को नई गति दे दी है।
