Assam UCC Bill Passed: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पास, अब बहुविवाह करने पर होगी 7 साल की जेल; जानें नए नियम

Assam UCC Bill Passed: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पास हो गया है। इस विधेयक के पास होने के बाद राज्य में शादी, तलाक, विरासत, बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह कानून “पूर्ण समानता और सामान्य न्याय” सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

Assam UCC Bill Passed: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पास हो गया है, जिसके बाद राज्य में पारिवारिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कई नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कानून को लेकर कहा कि इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है। दूसरी तरफ, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी सहित कई मुस्लिम नेता इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। ओवैसी ने इस विधेयक की आलोचना करते हुए इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने का परोक्ष प्रयास बताया है और दावा किया कि इसके जरिए उत्तराधिकार, विरासत और तलाक के मामलों में हिंदू सिद्धांतों को थोपा जा रहा है।

इस नए कानून के लागू होने के बाद असम में कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। यह कानून पूर्ण समानता और सामान्य न्याय सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा, हालांकि अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। नए नियमों के तहत राज्य में एकविवाह को अनिवार्य बना दिया गया है और अब एक से ज्यादा शादी करना पूरी तरह गैरकानूनी होगा। अगर कोई व्यक्ति द्विविवाह या बहुविवाह करता है, तो उसे बीएनएस 2023 की धारा 82 के तहत सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है। इसके साथ ही शादी के लिए दूल्हे की उम्र 21 वर्ष और दुल्हन की उम्र 18 वर्ष की मानक कानूनी आयु निर्धारित की गई है।

सांस्कृतिक विविधता की रक्षा के लिए इस कानून में रीति-रिवाजों को करने की पूरी आजादी दी गई है। इसके तहत विवाह किसी भी मौजूदा धार्मिक समारोह या परंपरा के माध्यम से संपन्न किए जा सकेंगे, जिनमें वैदिक विवाह, अहोम चकलोंग, सप्तपदी, आशीर्वाद, निकाह, पवित्र मिलन और आनंद कराई शामिल हैं। हालांकि, धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी विवाहों और तलाकों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) अनिवार्य कर दिया गया है। दंपत्तियों को शादी के 60 दिनों के भीतर सब-रजिस्ट्रार के सामने विवाह का मेमोरेंडम पेश करना होगा। अगर कोई जानबूझकर 60 दिनों के भीतर पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा, पंजीकरण के दौरान जाली दस्तावेज देने पर तीन महीने तक की कैद या 25,000 रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।

तलाक और बच्चों की कस्टडी को लेकर भी कानून में बदलाव किया गया है। अब तलाक के लिए क्रूरता, परित्याग या आपसी सहमति जैसे समान आधार निर्धारित किए गए हैं, जबकि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कस्टडी अनिवार्य रूप से माता के पास रहेगी। संपत्ति और उत्तराधिकार के मामले में यह कानून प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों के बीच एक समान और लिंग-समान वरीयता क्रम स्थापित करता है, जिसमें मृतक के पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा। वसीयत के माध्यम से संपत्ति देने के लिए किसी भी दिमागी रूप से स्वस्थ बालिग व्यक्ति को लिखित रूप में और गवाहों के सामने वसीयत बनवाने का कानूनी अधिकार दिया गया है।

इस कानून की एक और बड़ी बात यह है कि इसके तहत अब लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उसे तीन महीने तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, लिव-इन के रजिस्ट्रेशन के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या घोषणापत्र में झूठी जानकारी देने पर तीन महीने तक की कैद और 25,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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