नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल का असर अब भारतीय आसमान पर भी दिखने लगा है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगामी 1 अप्रैल 2026 से विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार की प्राथमिकता यात्रियों पर इस बढ़ती लागत का तुरंत बोझ पड़ने से रोकना है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मौजूदा स्थिति पर जानकारी देते हुए कहा कि एटीएफ की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को संशोधित की जाती हैं, और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण 1 अप्रैल से इसके दाम बढ़ना लगभग तय है। उन्होंने स्वीकार किया कि कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने और खाड़ी देशों के ऊपर से उड़ानों पर प्रतिबंध लगने के कारण एयरलाइंस कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च और बीमा लागत काफी बढ़ गई है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार एयरलाइंस कंपनियों के साथ निरंतर बातचीत कर रही है ताकि हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक भारी उछाल न आए।
हालाँकि सरकार की ओर से राहत के प्रयास जारी हैं, लेकिन वित्तीय दबाव झेल रही घरेलू एयरलाइंस कंपनियों ने अपनी लागत कम करने के लिए पहले ही ‘फ्यूल सरचार्ज’ (Fuel Surcharge) लागू कर दिया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू उड़ानों पर 399 रुपये का सरचार्ज लगाया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर यह दूरी के अनुसार 10 डॉलर से लेकर 200 डॉलर (लगभग 16,000 रुपये) तक जा रहा है। इसी तरह, इंडिगो ने 425 रुपये से 2,300 रुपये तक और अकासा एयर ने उड़ान की अवधि के आधार पर 199 रुपये से 1,300 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ यात्रियों पर डाला है।
जानकारों का मानना है कि यदि 1 अप्रैल को एटीएफ की कीमतों में बड़ी वृद्धि होती है, तो आने वाले गर्मियों के यात्रा सीजन में हवाई सफर काफी महंगा हो सकता है। फिलहाल मंत्रालय का पूरा ध्यान सुरक्षित और नियमित परिचालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ यात्रियों के हितों की रक्षा करने पर टिका है। हवाई यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए सलाह है कि वे बढ़ते किराए और सरचार्ज को ध्यान में रखते हुए अपनी बुकिंग समय से पहले कर लें।
