PM Modi Netherlands Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की छह दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण विदेशी यात्रा के अगले चरण में नीदरलैंड पहुंच गए हैं। इस रणनीतिक दौरे में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं, जिसे भारतीय निर्यात और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अनुसार, इस पूरे दौरे पर सत्तर अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार दांव पर लगा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU FTA) और टेपा (TEPA) जैसी बड़ी व्यापारिक संधियां चर्चा में हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, रक्षा और डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में एक विशाल वैश्विक बाजार मिलने की उम्मीद है।
अपनी यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रोब जेटन के विशेष आमंत्रण पर वहां पहुंचे हैं। इस दौरान वे नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी और उनके डच समकक्ष रोब जेटन के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने पर विस्तार से चर्चा होगी।
नीदरलैंड का यह दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री क्रमशः स्वीडन और नॉर्वे के लिए रवाना होंगे, और अपने इस पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में वे इटली पहुंचकर वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे।
इससे पहले, पंद्रह मई को प्रधानमंत्री मोदी अपनी इस यात्रा के पहले पड़ाव के तहत संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी पहुंचे थे, जहां हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ हुई उनकी विशेष बैठक भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद सफल रही। इस दौरान पीएम मोदी ने ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए यूएई प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत शांति, स्थिरता और पारस्परिक सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यूएई के इस संक्षिप्त मगर प्रभावी दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगी। दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करते हुए ‘सामरिक रक्षा साझेदारी’ पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और एलपीजी की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण समझौते किए गए, जबकि समुद्री बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए गुजरात के वाडिनार में एक आधुनिक ‘शिप रिपेयर क्लस्टर’ स्थापित करने हेतु सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत के लिए सबसे बड़ी आर्थिक कामयाबी यूएई द्वारा की गई पांच अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा रही, जिसके तहत भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के साथ-साथ आरबीएल (RBL) बैंक और ‘सम्मान कैपिटल’ में भारी पूंजी निवेश की जाएगी, जो दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक रिश्तों की गवाही देता है।
