सनातन धर्म और भारतीय धार्मिक इतिहास के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवादों के बीच यह खबर आई है कि आगामी 10 मार्च 2026 को देश के चारों पीठों के शंकराचार्य दिल्ली में एक साझा मंच पर नजर आ सकते हैं। मौका होगा ‘गो माता राष्ट्र माता अभियान’ के तहत आयोजित गो रक्षा का विशाल कार्यक्रम, जहाँ चारों पीठों के सर्वोच्च धर्मगुरुओं के एक साथ आने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
धार्मिक गलियारों में इस संभावित मिलन को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। वर्तमान में उन्हें दो अन्य पीठों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन यदि दिल्ली के इस मंच पर चारों शंकराचार्य एकजुट होते हैं, तो उनके पद को लेकर चल रहा ‘असली-नकली’ का विवाद स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। विशेष रूप से पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का रुख इस दिशा में निर्णायक माना जा रहा है। हालांकि वे पहले खुले तौर पर सहमति नहीं जता रहे थे, लेकिन हाल ही में माघ मेला क्षेत्र में उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को अपना ‘लाडला’ कहकर भविष्य के सकारात्मक संकेतों की ओर इशारा कर दिया है।
गो रक्षा का विषय चारों शंकराचार्यों के लिए सर्वोपरि रहा है। पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने तो गाय की रक्षा के संकल्प के लिए अपने सिंहासन और राजसी छत्र तक का त्याग कर रखा है। दिल्ली में होने वाला यह आयोजन केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि सनातन एकता का प्रतीक भी बनेगा। यदि यह सम्मेलन सफल रहता है, तो धार्मिक इतिहास में यह केवल तीसरी बार होगा जब चारों पीठों के अधिपति एक साथ किसी मंच की शोभा बढ़ाएंगे। सभी चारों शंकराचार्यों को औपचारिक निमंत्रण भेजने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।
चतुष्पीठ सम्मेलन के इतिहास की बात करें तो पहली बार ऐसा आयोजन साल 1779 में श्रृंगेरी में हुआ था। इसके करीब दो सौ वर्षों बाद, 19 मई 2007 को बेंगलुरु में रामसेतु के मुद्दे पर चारों शंकराचार्य एक साथ आए थे। अब 19 साल के लंबे अंतराल के बाद, गो रक्षा के पवित्र उद्देश्य के लिए दिल्ली का यह मंच ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बन सकता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी कई बार गो हत्या के खिलाफ मुखर रहे हैं, ऐसे में अन्य शंकराचार्यों का उनके साथ खड़ा होना भारतीय धर्म संस्कृति के लिए एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
