दिल्ली के नजफगढ़ और बाहरी दिल्ली के इलाकों में कभी खूंखार गैंगवार के दौरान आतंक का पर्याय रहा एक बड़ा आपराधिक नाम अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। मंजीत महल गिरोह से जुड़े रहे कुख्यात अपराधी नफे सिंह उर्फ मंत्री की तिहाड़ जेल के अंदर मौत हो गई है। फिलहाल शुरुआती तौर पर उसकी मौत की मुख्य वजह दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक बताई जा रही है, लेकिन मौत के असल कारणों की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक नफे सिंह तिहाड़ की जेल नंबर 8 में बंद था और उसके खिलाफ दिल्ली तथा हरियाणा के विभिन्न थानों में अपराधों की एक लंबी फेहरिस्त दर्ज थी। उसके ऊपर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे 12 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें अकेले हत्या के ही तीन गंभीर मामले शामिल थे।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, नफे सिंह उर्फ मंत्री मूल रूप से दिल्ली के घुम्मनहेड़ा इलाके का रहने वाला था। वर्ष 1998 में पहली बार उसका नाम पुलिस के दस्तावेजों में सामने आया था, जिसके बाद वह दिल्ली के नजफगढ़ और बाहरी दिल्ली के क्षेत्रों में सक्रिय मंजीत महल गैंग का एक सक्रिय और खतरनाक गुर्गा बन गया था।
साल 2015 और 2016 के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में सामने आई कई सनसनीखेज गैंगवार की वारदातों को अंजाम देने का सीधा आरोप नफे सिंह पर लगा था। इसके अलावा, पुरानी आपसी रंजिश का बदला लेने और विरोधी आपराधिक गिरोहों के वर्चस्व को पूरी तरह खत्म करने की नीयत से नफे सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कई बड़ी और खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया था।
पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा फरवरी 2017 में पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में एक विशेष अभियान चलाकर नफे सिंह को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने उसके पास से .32 बोर की एक अवैध पिस्तौल और पांच जिंदा कारतूस भी बरामद किए थे। उसके खिलाफ दर्ज कुल 12 मामलों में हत्या और हत्या के प्रयास के साथ-साथ आर्म्स एक्ट से जुड़ी धाराएं भी प्रमुख रूप से शामिल थीं। गिरफ्तारी के बाद से ही वह लगातार तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे बंद था और अपनी सजा व मुकदमों का सामना कर रहा था।
