Fuel Price Shock: शेल इंडिया ने पेट्रोल-डीजल के दाम में की भारी बढ़ोतरी, ₹25 प्रति लीटर महंगा हुआ डीजल

निजी क्षेत्र की तेल कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इससे पहले नायरा द्वारा दाम बढ़ाए जाने के बाद अब शेल के इस फैसले से ग्राहकों पर सीधा असर पड़ा है।

शेल इंडिया ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम
शेल इंडिया ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली: निजी क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नायरा एनर्जी के बाद अब शेल ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल का हवाला देते हुए अपने खुदरा दामों में संशोधन किया है। ‘मनीकंट्रोल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर और पेट्रोल के दामों में ₹7.41 प्रति लीटर की वृद्धि की है, जिससे आम आदमी और परिवहन क्षेत्र पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय है।

इस नई वृद्धि के बाद शेल इंडिया के पेट्रोल पंपों पर सामान्य डीजल की कीमत ₹123.52 प्रति लीटर और इसके प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। वहीं, बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के आधार पर इन कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व तेजी का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में आई बाधा है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है, जिससे कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।

राहत की बात यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है। सरकारी हस्तक्षेप के कारण इन कंपनियों ने खुदरा दरों में बदलाव नहीं किया है, जबकि निजी कंपनियों को सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती है। ऐसे में बढ़ती लागत और घाटे से बचने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के पास कीमतों में बढ़ोतरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale