RBI’s 3-Day Meeting Begins: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक आज यानी 3 दिसंबर से शुरू हो गई। यह बैठक तीन दिनों तक चलेगी और 5 दिसंबर को इसमें लिए गए फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार RBI ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। फिलहाल रेपो रेट 5.50% है और अगर कटौती की घोषणा होती है तो यह 5.25% पर आ जाएगी।
सरकार और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्याज दर कम होती है तो लोन सस्ता होगा और इससे आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक सभी को राहत मिलेगी। कम ब्याज दर से EMI घटेगी, नई लोन लेने वालों को फायदा मिलेगा और रियल एस्टेट के साथ ऑटो सेक्टर में मांग बढ़ सकती है। अर्थव्यवस्था में कैश फ्लो बढ़ेगा जिससे ग्रोथ को मजबूती मिल सकती है।
महंगाई वर्तमान समय में नियंत्रण में दिखाई दे रही है और रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले महीनों में इसमें और गिरावट की संभावना है। इसी कारण मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी को ब्याज दर कम करने का एक बेहतर मौका मिल सकता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस वर्ष RBI पहले ही तीन बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है। फरवरी में पहली बार इसे 6.50% से घटाकर 6.25% किया गया। इसके बाद अप्रैल महीने में 0.25% और कटौती की गई। इसके बाद जून में MPC ने तीसरी बार ब्याज दरें घटाईं और 0.50% की कमी की घोषणा की। यानी इस साल कुल मिलाकर 1% की कटौती हो चुकी है। हालांकि इसके बाद दो बैठकों में रेपो रेट स्थिर रखा गया था।
रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर आर्थिक प्रणाली पर पड़ता है। जब केंद्रीय बैंक रेपो रेट घटाता है तो बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और बैंक ग्राहकों के लिए लोन सस्ता कर देते हैं। इससे लोग अधिक लोन लेते हैं और मार्केट में पैसा अधिक चलता है जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। इसके विपरीत जब महंगाई बहुत बढ़ जाती है तो RBI रेपो रेट बढ़ा देता है। इससे कर्ज महंगा हो जाता है, बाजार में कैश का प्रवाह कम होता है और मांग घटती है जिससे महंगाई नियंत्रित होने लगती है। इस तरह रेपो रेट भारतीय अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने का एक सबसे बड़ा और सीधा आर्थिक औजार माना जाता है।
अब सबकी निगाहें 5 दिसंबर पर हैं। अगर RBI इस बार ब्याज दर कम करता है तो यह इस साल चौथी कटौती होगी और इसका फायदा सीधे आम जनता तक पहुंचेगा। वहीं यदि ब्याज दर स्थिर रहती है तो इसका मतलब यह होगा कि आने वाले महीनों में RBI आर्थिक संकेतकों को और स्पष्ट रूप से देखना चाहता है। फिलहाल देश में गृह लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन से जुड़े ग्राहकों में इस फैसले को लेकर काफी उत्सुकता है।
