Nokia Layoffs: टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी नोकिया (Nokia) से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कंपनी अपने वैश्विक कार्यबल में भारी कटौती की योजना बना रही है, जिसका सीधा असर भारत में कार्यरत कर्मचारियों पर भी पड़ने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, नोकिया अपने कुल 74,100 कर्मचारियों के वैश्विक वर्कफोर्स में से लगभग 20% की छंटनी करने की तैयारी में है। भारत इकाई में भी इसी अनुपात में कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
यह कदम नोकिया के सीईओ जस्टिन हॉटार्ड द्वारा नवंबर 2025 में घोषित किए गए एक व्यापक ढांचागत बदलाव (Restructuring) का हिस्सा है, जिसे साल 2026 तक पूरी तरह लागू किया जाना है। इस नई रणनीति के तहत कंपनी ने खुद को दो मुख्य हिस्सों—नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर—में बांटने का फैसला किया है। जो व्यवसाय कंपनी की मुख्य प्राथमिकताओं से बाहर हैं, उन्हें समीक्षा या संभावित बिक्री (Divestment) के लिए अलग रख दिया गया है। कंपनी का उद्देश्य अपने कामकाज को सुव्यवस्थित करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित उभरती वैश्विक मांग के अनुरूप खुद को ढालना है।
छंटनी की खबरों के बीच कंपनी के भारतीय नेतृत्व में भी बड़े फेरबदल किए गए हैं। तरुण छाबड़ा ने भारत के ‘कंट्री हेड’ पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह समर मित्तल को भारत के ‘कंट्री बिजनेस लीडर’ के रूप में पदोन्नत किया गया है, जो अब शुरू से अंत तक पूरे क्लाइंट पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, विभा मेहरा को भारत की ‘कंट्री मैनेजर’ के पद पर प्रमोट किया गया है। नेतृत्व में किए गए ये सभी बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।
नोकिया के कार्य मॉडल में यह बदलाव 2023 से पहले के उस ढांचे से बिल्कुल अलग है, जब पूर्व सीईओ पेक्का लुंडमार्क के समय कंपनी मोबाइल नेटवर्क्स, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाउड सर्विसेज जैसे तीन समूहों में बंटी हुई थी। उस समय सेल्स टीमें ग्राहक संबंधों का सीधा प्रबंधन करती थीं, लेकिन अब वर्टिकल मॉडल अपनाने के कारण ग्राहक अनुभव, बिक्री और मार्केटिंग से जुड़े कई केंद्रीय पदों को समाप्त कर दिया गया है। फिलहाल, कर्मचारियों के बीच इस छंटनी को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
