Petrol-Diesel Prices Today: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में उपजे संकट के बीच भारत सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और निजी ईंधन कंपनियों द्वारा रेट बढ़ाए जाने के बाद सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty) में भारी कटौती का ऐलान किया है।
एक्साइज ड्यूटी में कितनी हुई कटौती?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव को कम करने के लिए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर मात्र 3 रुपये कर दिया है। वहीं, डीजल पर लगने वाली 10 रुपये की ड्यूटी को पूरी तरह शून्य (Zero) कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हुई 50% तक की बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू स्तर पर तेल के दामों को स्थिर रखना और महंगाई पर लगाम लगाना है।
निजी कंपनी ‘नयरा एनर्जी’ ने बढ़ाए थे दाम
सरकार का यह फैसला देश की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेलर नयरा एनर्जी (Nayara Energy) द्वारा कीमतों में की गई बढ़ोतरी के तत्काल बाद आया है। इनपुट लागत बढ़ने का हवाला देते हुए नयरा ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए थे। बता दें कि देश के कुल 1,02,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 का संचालन नयरा एनर्जी ही करती है। निजी क्षेत्र की इस बढ़ोतरी के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि सरकारी तेल कंपनियां भी रेट बढ़ा सकती हैं, लेकिन ड्यूटी में कटौती ने इस संभावना को फिलहाल टाल दिया है।
होर्मुज संकट और भारत की निर्भरता
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है, जो भारत के लिए अत्यंत चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40-50% कच्चा तेल (करीब 2.2 से 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन) इसी रास्ते से मंगवाता है। 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमलों के बाद से तेल बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, ईरान द्वारा भारत समेत मित्र देशों के जहाजों को रास्ता देने के हालिया संकेतों और अब सरकार द्वारा टैक्स कटौती से देश में ईंधन की किल्लत और कीमतों के बढ़ने का खतरा काफी कम हो गया है।
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
फरवरी के अंत से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन भारत में खुदरा कीमतें काफी समय से स्थिर बनी हुई थीं। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) भारी दबाव में थीं। अब एक्साइज ड्यूटी कम होने से इन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी और वे उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ डाले बिना सप्लाई जारी रख सकेंगी।
