Crude Oil Price: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान युद्ध को लेकर दिए गए ताजा संबोधन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु शक्ति नहीं बनने देगा और अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर एक ‘बड़ी कार्रवाई’ की तैयारी है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है और शेयर बाजारों में बिकवाली का दौर शुरू हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
बुधवार तक राहत दे रही तेल की कीमतें ट्रंप के बयान के बाद अचानक भड़क उठी हैं। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 5% की छलांग लगाकर $106.22 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि एक दिन पहले यह $100 के नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी क्रूड भी 4.2% बढ़कर $104.36 प्रति बैरल पर आ गया है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो देश यहाँ से तेल आयात करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा। इस अनिश्चितता ने हर घंटे तेल के दामों में बढ़ोतरी दर्ज कराई है।
एशियाई बाजारों में मची भगदड़
तेल की बढ़ती कीमतों और युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका से एशियाई बाजारों में गुरुवार सुबह भारी गिरावट देखी गई। प्रमुख सूचकांकों की स्थिति इस प्रकार रही:
- निक्केई 225 (टोक्यो): 1.4% गिरकर 53,004.81 पर।
- कोस्पी (दक्षिण कोरिया): 3.4% की भारी गिरावट के साथ 5,292.36 पर।
- हैंग सेंग (हांगकांग): 0.8% फिसलकर 25,082.59 पर।
- अमेरिकी वायदा बाजार: 0.7% से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहे हैं।
भारत के लिए दोहरी चुनौती
भारत के लिए स्थिति काफी चिंताजनक होती दिख रही है। एक तरफ कच्चा तेल कल की तुलना में करीब $8 प्रति बैरल महंगा हो चुका है, जिससे आयात बिल और महंगाई बढ़ने का खतरा है। दूसरी तरफ, भारतीय शेयर बाजार के लिए भी संकेत अच्छे नहीं हैं। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) 450 अंकों से ज्यादा की गिरावट का संकेत दे रहा है, जिससे आज घरेलू बाजार में एक बड़े ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग और बिकवाली के दबाव की संभावना जताई जा रही है।
ट्रंप की चेतावनी का असर
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बेहद करीब है और वे ईरान के साथ किसी भी तरह की ‘डील’ करने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने अन्य देशों से होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा में जिम्मेदारी लेने की अपील करते हुए कहा कि अमेरिका उनकी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई तेज होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें $110 के स्तर को भी पार कर सकती हैं, जो वैश्विक रिकवरी के लिए एक बड़ा झटका होगा।
