Petrol Diesel Price Hike: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने वर्ष 2022 के बाद पहली बार आम उपभोक्ताओं के इस्तेमाल वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की है। यद्यपि शुक्रवार को हुए इस इजाफे के बाद शनिवार को कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इस बढ़ोतरी ने आम जनता के बजट पर सीधा असर डाला है।
इस मूल्य वृद्धि के बाद देश के प्रमुख महानगरों में ईंधन की नई कीमतें लागू हो गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का भाव 3 रुपये बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब पेट्रोल 106.68 रुपये और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 108.70 रुपये और डीजल का रेट बढ़कर 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि चेन्नई में तेल कंपनियां पेट्रोल 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेच रही हैं।
ईंधन की कीमतों में आई इस अचानक तेजी का मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता संघर्ष है, जिसके चलते ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला रणनीतिक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग बंद होने की कगार पर है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह मार्ग इस मायने में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की कुल जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर आपूर्ति बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की ऐतिहासिक गिरावट, जो वर्तमान में प्रति डॉलर 96 रुपये के पार जा चुकी है, ने भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए तेल खरीद की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
इस विपरीत परिस्थिति का सबसे बड़ा नुकसान देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उठाना पड़ रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का भारी घाटा हो रहा है, और अब तक यह कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूर्व में पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स में 10-10 रुपये की कटौती भी की थी और हाल ही में प्रीमियम ईंधन के दाम भी बढ़ाए थे, लेकिन वैश्विक संकट गहराने के कारण अंततः सामान्य ईंधन की कीमतें बढ़ाना अपरिहार्य हो गया।
पेट्रोलियम उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार को की गई 3 रुपये की यह बढ़ोतरी मौजूदा घाटे की भरपाई के लिए बेहद कम है। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दरों के मुकाबले भारतीय तेल कंपनियां अब भी पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर का बड़ा अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि पश्चिम एशिया का संकट जल्द नहीं सुलझा और कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले दिनों में आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
