Digital Arrest Scams: देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने पूरे भारत में इस तरह के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपते हुए सभी राज्यों की पुलिस को निर्देश दिया है कि वे जांच में CBI का पूरा सहयोग करें। साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने कहा कि आईटी मध्यस्थ नियम 2021 के तहत सभी संबंधित प्राधिकारी CBI को आवश्यक सहायता प्रदान करें। अब दो हफ़्ते बाद इस मामले पर फिर सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल अरेस्ट सहित साइबर क्राइम के कई मामलों में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अदालत के संज्ञान में लाई गई घटनाओं की जांच के बाद एमाइकस क्यूरी ने घोटालों को तीन श्रेणियों में बांटा है — डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और पार्ट-टाइम जॉब स्कैम। ये सभी संगठित साइबर अपराध हैं, जहां लोगों को धमकाकर या बड़े पैसे कमाने का झांसा देकर ठगा जाता है।
कोर्ट ने कहा कि चूंकि इन अपराधों का दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है, इसलिए CBI को जरूरत पड़ने पर इंटरपोल अधिकारियों से मदद लेने की अनुमति दी जाती है। जिन राज्यों ने अब तक केंद्रीय एजेंसी को सहमति नहीं दी है, उन्हें भी निर्देश दिया गया है कि वे IT Act के तहत जांच के लिए सहमति प्रदान करें ताकि CBI देशभर में व्यापक स्तर पर कार्रवाई कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग से भी जवाब मांगा है। यदि सिम कार्ड जारी करने में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो उस नेटवर्क कंपनी पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि मोबाइल सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए दूरसंचार प्रदाताओं को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे।
इसके अलावा कोर्ट ने CBI को यह भी अधिकार दिया कि वह बैंकिंग प्रणाली के भीतर शामिल किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच कर सके, जिनके जरिए ठगी से जुड़े बैंक खाते खोले गए। साथ ही RBI को निर्देश दिया गया कि वह बताएं कि कब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें शामिल कर ऐसे खातों की पहचान शुरू की जाएगी, जिससे अपराध की आय को तुरंत रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण के लिए अब तक की सबसे बड़ी न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश के नागरिकों, खासकर बुजुर्गों को साइबर अपराधियों से बचाने के लिए अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
