पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत और उनके परिवार के प्रति कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शहबाज शरीफ की सरकार इस मामले में उठ रहे सवालों का जवाब नहीं दे पा रही है और इसी बीच सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के विवादित बयान ने स्थिति और जटिल बना दी है। रविवार को दिए गए अपने बयान में तरार ने इमरान खान की बहनों को ‘शर्म से मर जाने’ की नसीहत दी, जिससे पाकिस्तान में राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया।
अताउल्लाह तरार ने अपने बयान में भारत और अफगानिस्तान की मीडिया को निशाने पर रखते हुए कहा कि इमरान खान की बहनें विदेशी चैनलों पर जाकर अपने भाई के लिए रो रही हैं, जबकि पाकिस्तान में शहीदों के लिए कुछ नहीं बोलतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये बहनें विदेशी मीडिया का प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। तरार का कहना था कि जो लोग पाकिस्तान की आलोचना करने के लिए दूसरे देशों के चैनल का सहारा लेते हैं, उन्हें ‘शर्म से मर जाना चाहिए’।
इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि इमरान खान पूरी तरह ठीक हैं और रोजाना ट्रेडमिल पर दौड़ते हैं। उनका कहना था कि परिवार और मीडिया द्वारा उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाया गया “हाइप” गलत है।
🇵🇰⚠️ Pakistan’s “Information Meme Minister” Attaullah Tarar lashes out at Imran Khan’s sister for appearing on Indian TV.
— TridentX ᴵⁿᵗᵉˡ (@TridentxIN) December 1, 2025
He accuses her of “harming national interest” and defending a convicted relative in the £190M scandal.#ImranKhan #PakistanArmy pic.twitter.com/J1nvwkmP7b
वहीं, हाल ही में इमरान की बहनों अलीमा खान, डॉ. उज़मा खान और नोरीन ने अदियाला जेल के बाहर अपने भाई से मिलने की मांग करते हुए धरना दिया था। उनके साथ पीटीआई के अन्य सदस्य भी धरने में शामिल हुए। इस दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, और उनके साथ हुई कार्रवाई के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इन तस्वीरों और वीडियोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान सरकार की आलोचना को बढ़ावा दिया।
सूत्रों के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार इस विवाद से बचने और इमरान खान की सेहत को लेकर आश्वस्त करने का प्रयास कर रही है। लेकिन मंत्री के कड़े बयान और बहनों के साथ हुई बदसलूकी ने पाकिस्तान की राजनीति और मीडिया के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इस घटना ने देश में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है और विपक्षी दलों के लिए भी सरकार पर सवाल उठाने का अवसर पैदा कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान में इमरान खान और उनके परिवार को लेकर उठ रहे सवाल सरकार के लिए अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। सूचना मंत्री के विवादित बयान ने हालात को और जटिल बना दिया है, जबकि इमरान खान की बहनों की सक्रियता और उनके विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय ध्यान में ला दिया है।
