UAE Visa Ban Pakistan: आतंकवाद को बढ़ावा देने और अपराधों में बढ़ती संलिप्तता के कारण पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर किरकिरी हो रही है। मुस्लिम देशों के बीच भी पाकिस्तान की छवि लगातार खराब होती जा रही है। सऊदी अरब द्वारा हाल ही में 5,000 पाकिस्तानी नागरिकों को भीख मांगने और अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने के बाद निर्वासित किया गया था। अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी पाकिस्तानियों के लिए वीजा जारी करना लगभग बंद कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE अब साधारण पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों को न तो पर्यटक और न ही व्यवसायिक या वर्क वीजा दे रहा है।
खाड़ी देश ने औपचारिक रूप से इसे “पूर्ण प्रतिबंध” नहीं बताया है, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले कुछ महीनों से नए वीज़ा आवेदनों को मंजूरी मिलना लगभग असंभव हो चुका है। केवल ब्लू पासपोर्ट (स्पेशल कैटेगरी) और राजनयिक पासपोर्ट धारकों को ही वीज़ा जारी किया जा रहा है, जबकि सामान्य श्रेणी के 80% से अधिक आवेदन बिना किसी स्पष्ट कारण के रद्द किए जा रहे हैं।
UAE का यह कदम पाकिस्तानियों के बीच बढ़ती अपराध दरों के चलते उठाया गया है। खाड़ी देशों की एजेंसियों के अनुसार बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक वहां पहुंचने के बाद आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो रहे थे, जिनमें भीख मांगना, सड़क अपराध, तस्करी, मानव तस्करी, नकली दस्तावेज़, चोरी और हत्या तक शामिल हैं। UAE सरकार की चिंता है कि ऐसे लोग देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं और उनका मकसद नौकरी या पर्यटन नहीं, बल्कि आपराधिक नेटवर्क का विस्तार है।
पाकिस्तानी अखबार द डॉन की रिपोर्ट बताती है कि UAE ने अनौपचारिक रूप से कई श्रेणियों में वीज़ा रोक दिया है, और जब तक सुरक्षा तथा प्रवासन नीति की समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक यह स्थिति जारी रहेगी। यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि UAE पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नौकरी, व्यापार और रेमिटेंस का सबसे बड़ा केंद्र रहा है।
UAE और सऊदी अरब में लाखों पाकिस्तानी नागरिक काम करते हैं और वहीं से पाकिस्तान को हर साल अरबों डॉलर विदेशी मुद्रा के रूप में मिलता है। वर्ष 2024 में अकेले UAE से पाकिस्तान को 34 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ था। लेकिन वीज़ा प्रतिबंध के बाद यह रकम भारी गिरावट की ओर बढ़ सकती है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही रिकॉर्ड महंगाई, राजनीतिक संकट और विदेशी कर्ज के बोझ से जूझ रही है। ऐसे में इस फैसले का असर वहां की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर सकता है।
खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर दुबई, अबू धाबी, रियाद और जेद्दा लंबे समय से पाकिस्तानी नागरिकों की पहली पसंद रहे हैं। हर साल करीब 8 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी मध्य पूर्व में नौकरी और प्रवास के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन अपराधों में लगातार वृद्धि और संगठित भीख माफिया गिरोहों की वजह से अब खाड़ी सरकारें उनके प्रति सख्त रुख अपनाने लगी हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब ऐसे कदम उठाए गए हैं। इससे पहले दिसंबर 2024 में भी UAE, सऊदी अरब और कई अन्य खाड़ी देशों ने पाकिस्तान के करीब 30 शहरों के नागरिकों को वीज़ा देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय आरोप लगाया गया था कि ये लोग विदेश जाकर सड़क पर भीख मांगते हैं और ड्रग्स तथा मानव तस्करी नेटवर्क का हिस्सा होते हैं।
साल की शुरुआत में ही सऊदी अरब ने 5,000 पाकिस्तानी भिखारियों को पकड़ा और उन्हें वापस पाकिस्तान भेज दिया। इनमें कई लोग पर्यटक वीज़ा पर आए थे, लेकिन मस्जिदों, ट्रैफिक सिग्नलों, बाज़ारों और सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगते हुए पकड़े गए।
UAE का यह फैसला पाकिस्तान के लिए सिर्फ कूटनीतिक झटका नहीं, बल्कि आर्थिक संकट की नई शुरुआत भी माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान सरकार इस अंतरराष्ट्रीय बदनामी और आर्थिक खतरे से निपटने के लिए कौन से कदम उठाती है।
