पियूष पांडे (Piyush Pandey) का गुरुवार को 70 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भारतीय विज्ञापन (Indian Advertising) को नई दिशा दी और आम लोगों की भाषा में कहानियां बताने का अंदाज़ पेश किया। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) ने भारत और दुनिया दोनों में पहचान बनाई।
जयपुर में जन्मे पियूष पांडे (Piyush Pandey) ने अपने करियर की शुरुआत रेडियो जिंगल्स से की थी। ओगिल्वी इंडिया में 1982 में शामिल होकर उन्होंने उस समय की अंग्रेज़ी और एलीट शैली वाले विज्ञापनों को आम लोगों की ज़िंदगी और भावनाओं से जोड़ दिया।
उनके बनाए गए विज्ञापन जैसे एशियन पेंट्स – “हर खुशी में रंग लाए”, कैडबरी – “कुछ खास है”, फेविकोल – “एग” विज्ञापन और हच – पग ऐड आज भी लोगों की यादों में बसे हुए हैं। उनकी कहानी कहने की कला और ज़मीन से जुड़ी सोच ने विज्ञापनों को भारतीय जीवन का आईना बना दिया।
पियूष पांडे (Piyush Pandey) हमेशा विनम्र और टीम के खिलाड़ी रहे। उन्होंने कई अवॉर्ड्स जीते, जिनमें कान्स लायंस (Cannes Lions) का Lion of St. Mark और CLIO Lifetime Achievement Award शामिल हैं। वे पद्मश्री से सम्मानित होने वाले भारतीय विज्ञापन जगत के पहले व्यक्ति भी थे।
उनका मानना था कि अच्छा विज्ञापन दिल को छूना चाहिए, सिर्फ दिमाग को नहीं। इसी सोच ने उन्हें राजनीतिक और ब्रांड कैम्पेन दोनों में सफलता दिलाई। उनका लिखा नारा “अब की बार, मोदी सरकार” इसके उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।
पियूष पांडे (Piyush Pandey) सिर्फ विज्ञापन क्रिएटिव नहीं थे, वे भारतीय विज्ञापन की आत्मा और आवाज़ थे।
