Narak Chaturdashi 2025: धनतेरस की शाम यम दीपक क्यों जलाते हैं? जानें तेल, बत्तियां और दीया रखने के जरूरी नियम और सावधानियां

धनतेरस या छोटी दिवाली की शाम को यम दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। माना जाता है कि इस दीपक को जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज प्रसन्न होते हैं। यह दीपक घर के बाहर, दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, क्योंकि यह दिशा यमराज की मानी जाती है।

Yama Deepam on Dhanteras
Yama Deepam on Dhanteras

Narak Chaturdashi 2025: दीपावली पर्व का उत्सव जल्द ही शुरू हो जाएगा। यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है और भारत के सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दिवाली आने से पहले कई और नियमों का पालन करना होता है जैसे साफ-सफाई, धनतेरस के नियम और यम का दीपक जलाना, जिसके बाद आती है दिवाली।

दीपावली पर्व धनतेरस यानी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि से शुरू हो जाता है। इस दिन यम का दीपक जलाने का विधान है। मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज के नाम से इस दिन एक दीपक जलाकर घर से बाहर निकाला जाता है। दीपक जलाते हुए यह कामना की जाती है कि घर के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा हो और यम देव का आशीर्वाद घर पर बना रहे। आइए, यम के दीपक से जुड़ी सभी प्रमुख बातों और नियमों को जानें।

क्यों जलाते हैं यम का दीपक

धनतेरस या छोटी दिवाली की शाम को यम दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। माना जाता है कि इस दीपक को जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और यमराज प्रसन्न होते हैं। यह दीपक घर के बाहर, दक्षिण दिशा में जलाया जाता है, क्योंकि यह दिशा यमराज की मानी जाती है। ऐसा करने से परिवार के सभी सदस्यों की लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा बनी रहती है।

धनतेरस त्रयोदशी तिथि पर निकलेगा यम का दीपक

हिंदू पंचांग की मानें तो कार्तिक माह में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस साल (तिथि सूचना के अनुसार – 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को दोपहर 01:51 बजे समाप्त हो जाएगी)। पंचांग के अनुसार 18 अक्टूबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा और इसी दिन यम का दीपक भी घर से निकाला जाएगा।

दीये की दिशा और स्थान से जुड़ा नियम

नरक चतुर्दशी या धनतेरस की शाम को यम दीपक जलाते समय दिशा का खास ध्यान रखना जरूरी होता है।

  • दीपक का चुनाव: गेहूं के आंटे का दीपक या मिट्टी का चौमुखी (चार बत्तियों वाला) दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • दिशा: यम दीपक हमेशा दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है।
  • तेल और बत्तियां: दीपक में सरसों का तेल ही डालें और चार बत्तियां लगाएं। यह चार बत्तियां जीवन के चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक हैं।
  • स्थान: दीपक जलाने के बाद उसे घर के सभी कोनों में घुमाएं, ताकि हर स्थान पर सकारात्मक ऊर्जा पहुंचे। अंत में दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बाहर ही रह जाती है।

दीया जलाने से जुड़ी सावधानियां

  • जो भी यम का दीया लें, ध्यान रखें कि वो चौमुखी हो यानी उसमें 4 बत्तियां लगी होनी चाहिए।
  • दीपक जलाने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल करें।
  • दीपक जलाने के बाद इसे घर से निकालें और घर के बाहर ही दक्षिण दिशा की ओर दीपक का मुख करके रखें।
  • दीपक जलाते समय सच्चे मन से भगवान से प्रार्थना करें कि पूरा परिवार स्वस्थ रहे और सभी परेशानियों से मुक्ति पाए।
  • कई बार ऐसा होता है कि यम का दीपक लोग नाली के पास रख आते हैं, ऐसा कतई न करें।

दीपदान से घर में हर ओर सुख-समृद्धि की आवक बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इस तरह, दीपावली की शुरुआत में यम का यह दीपक जलाना परिवार के कल्याण और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण परंपरा है।

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