काठमांडू: नेपाल में जारी राजनीतिक गतिरोध और तख्तापलट के बाद एक ऐतिहासिक मोड़ आया है — पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करने पर सहमति बन गई है। विभिन्न दलों, नेपाली सेना और युवा प्रदर्शनकारी (Gen-Z) के बीच चली कई दौर की वार्ता के बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने संविधान के अनुच्छेद 61(4) के प्रावधान का उपयोग करते हुए कार्की को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का निर्णय लिया है। शीतल निवास के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति कार्की को आज सुबह 11 बजे तक शपथ भी दिला सकते हैं।
काठमांडू के मेयर और पीएम पद के दावेदार बालेन शाह ने भी सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया है, जिससे राजनीतिक सहमति और भी मजबूत हुई। कहा जा रहा है कि सेना, राजनीतिक दलों और युवा नेतृत्व के बीच हुई सहमति ने इस नियुक्ति को संभव बनाया है, ताकि देश में स्थिरता लौट सके और संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
सुशीला कार्की न्यायिक क्षेत्र की वरिष्ठ हस्ती हैं — वे नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और भ्रष्टाचार-विरोधी कई फैसलों के लिए जानी जाती हैं। 73 वर्षीय कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर में हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की; बाद में उन्होंने लॉ प्रैक्टिस शुरू की और न्यायिक पदयात्रा निभाई।
उनका कार्यकाल चीफ जस्टिस के रूप में दीर्घकालिक नहीं रहा — 11 जुलाई 2016 को वे सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं, किन्तु 30 अप्रैल 2017 को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश होने के बाद उन्हें उस पद से निलंबित कर दिया गया था। बावजूद इसके, न्याय के मैदान में उनके फैसलों और युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता का विशेष प्रभाव रहा है। कार्की को भारत के साथ मधुर संबंधों का पक्षधर भी माना जाता है।
राष्ट्रपति के फैसले से पहले राष्ट्रपति कार्यालय ने प्रमुख राजनीतिक दलों व संविधान विशेषज्ञों से परामर्श किया और मध्यरात्रि तक विचार-विमर्श जारी रखा। शपथ ग्रहण के बाद कार्की से उम्मीद जताई जा रही है कि वे एक अंतरिम शासन चलाकर जल्द नए चुनाव कराए जाने की प्रक्रिया सुनिश्चित कराने में मदद करेंगी और देश में क्रमिक बहाली लाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
दूसरी ओर, देश में हालिया हिंसा और संघर्ष से जुड़े दुख और संवेदनाओं का भी संकेत मिला है। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने रॉयल फैमिली के माध्यम से शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जो कुछ हुआ वह अत्यंत दुखद है; शहीद हुए युवाओं को श्रद्धांजलि दी और जिम्मेदारों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की।
नेपाल की राजनीति के इस संवेदनशील और परिवर्तनशील दौर में सुशीला कार्की की नियुक्ति देश में शांति-स्थिरता स्थापित करने और संवैधानिक व्यवस्थाओं को पुनर्स्थापित करने के प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। शपथ और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
