भारत ने 06 सितंबर 2025 को व्लादिवोस्तोक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) व्यापार मंत्रियों की बैठक में साझा समृद्धि के लिए एससीओ की सामूहिक शक्तियों का उपयोग करने पर जोर दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि निर्यात विविधीकरण, निर्भरता कम करना और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, सदस्य देशों के बीच व्यापार प्रवाह बढ़ाने और समावेशी विकास को गति देने के लिए अत्यावश्यक है।
बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वाणिज्य विभाग के अपर सचिव अमिताभ कुमार ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली खुली, निष्पक्ष, समावेशी और भेदभाव-रहित होनी चाहिए, जिसमें डब्ल्यूटीओ केंद्र में रहे। उन्होंने सार्वजनिक भंडारण, विवाद निपटान प्रणाली की बहाली और विकासशील देशों को विशेष व विभेदक उपचार देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
भारत ने एमएसएमई की व्यापक भागीदारी, सेवा व्यापार और पेशेवरों की अस्थायी आवाजाही को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए बेहतर बाज़ार पहुँच और सुव्यवस्थित व्यापार सुविधा पर काम करना होगा। भारत ने चेतावनी दी कि निर्यात उपायों का उपयोग किसी भी तरह से कृत्रिम कमी या आपूर्ति श्रृंखला बाधित करने के हथियार के रूप में नहीं होना चाहिए।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत ने निष्पक्ष और पारदर्शी ढाँचों, सर्वोत्तम प्रथाओं पर सहयोग और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे यूपीआई, इंडिया स्टैक और ओएनडीसी को वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
सतत विकास के लिए भारत ने सीबीडीआर-आरसी सिद्धांत, मिशन लाइफ और किफायती प्रौद्योगिकी प्रवाह की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, एवीजीसी क्षेत्र (एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) को रोज़गार और निर्यात का बड़ा इंजन बताते हुए, भारत ने अपने हालिया वेव्स 2025 सम्मेलन की उपलब्धियों को साझा किया।
अंत में, भारत ने रूस की अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा कि वह 2026-27 में ताजिकिस्तान की अध्यक्षता में एससीओ सीएचजी के साथ मिलकर सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
