यमुना नदी खतरे के निशान पर, दिल्ली के निचले इलाकों में दहशत

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बांध बनने के बाद से ही संबंधित विभाग ने इसकी ठीक से देखरेख नहीं की। बरसात के समय जलभराव से निपटने के लिए विभाग ने वज़ीराबाद इलाके में वाटर पंप लगाए, लेकिन बांध पर पानी छोड़े जाने के चलते यमुना पुस्ता डैमेज हो गया।

Yamuna River Crosses Danger Mark, Low-Lying Areas of Delhi on Alert
Yamuna River Crosses Danger Mark, Low-Lying Areas of Delhi on Alert

उत्तरी दिल्ली के कई इलाकों में एक बार फिर यमुना नदी का जलस्तर खतरे की घंटी बजा रहा है। वज़ीराबाद से लेकर हिरणकी पुलिस चौकी तक बना यमुना पुस्ता बांध इस समय खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है। जगतपुर, मिलन विहार, संत नगर और बुराड़ी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है।

दिल्ली की यमुना नदी चार दिन पहले शांत हो चुकी थी, लेकिन अब फिर से उफान पर है। यमुना नदी की तेज धारा खतरे के निशान के करीब बह रही है। ऐसे में निचले रिहायसी इलाकों को खाली कराया जा चुका है, लेकिन यमुना पुस्ता बांध के दूसरी तरफ बनी इमारतों वाली घनी आबादी में अब लोगों को बाढ़ का खतरा बांध के डैमेज होने के कारण सताने लगा है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ते जलस्तर ने यमुना को उफान पर ला दिया है। यमुना नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो यमुना पुस्ता बांध टूट सकता है और बाढ़ का पानी सीधे रिहायशी बस्तियों में घुस सकता है। यमुना बांध के किनारों पर मिट्टी का लगातार कटाव हो रहा है और यह कटाव कभी भी खतरे का रूप ले सकता है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बांध बनने के बाद से ही संबंधित विभाग ने इसकी ठीक से देखरेख नहीं की। बरसात के समय जलभराव से निपटने के लिए विभाग ने वज़ीराबाद इलाके में वाटर पंप लगाए, लेकिन बांध पर पानी छोड़े जाने के चलते यमुना पुस्ता डैमेज हो गया। मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। बांध की कमजोर दीवारों पर सिर्फ मिट्टी के कट्टे डाल दिए गए हैं, जो तेज बहाव और लगातार बारिश के सामने टिक नहीं पाएंगे। लोगों की चिंता यह भी है कि यदि समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो हजारों परिवारों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। रिहायशी इलाकों के लोग दिन-रात बाढ़ के खतरे से सहमे हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से सिर्फ निगरानी का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि तुरंत पुख्ता मरम्मत और सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं ताकि बाढ़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। यानी यमुना के उफान और खस्ताहाल पुस्ता बांध ने दिल्ली के इन इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की नींद उड़ा दी है। अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो खतरा कभी भी विकराल रूप ले सकता है।

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