TRP (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट) को मापने के लिए मोदी सरकार ने नए नियम प्रस्तावित किए हैं। जनता को 30 दिनों के भीतर प्रस्तावित नीति पर अपनी प्रतिक्रिया देनी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा जारी मसौदे के तहत कई अहम बदलाव किए गए हैं।
- अब BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) ही एकमात्र एजेंसी नहीं होगी जो TRP को मापेगी। अन्य योग्य कंपनियों को भी इसमें प्रवेश का मौका मिलेगा।
- इन नई कंपनियों को भारत में स्थानीय रूप से पंजीकृत होना जरूरी होगा, और उन्हें कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत रहना होगा।
- लोगों द्वारा टीवी देखने के आधुनिक तरीकों — जैसे स्मार्ट टीवी, ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरनेट व्यूअरशिप — को भी यह नया नियम ध्यान में रखेगा।
- नए TRP नियमों में स्ट्रीमिंग और मोबाइल व्यूअरशिप को मापने के तरीके शामिल होंगे, जिससे रेटिंग प्रक्रिया अधिक व्यापक और सटीक बन सके।
- रेटिंग एजेंसियों को अब ऐसी परामर्श या सलाहकार सेवाएँ देने से भी रोका जाएगा, जिससे उनके मुख्य काम यानी रेटिंग में किसी प्रकार का हितों का टकराव (Conflict of Interest) न हो।
- इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने TRP नीति के पुराने ढांचे में भी संशोधन किए हैं। खंड 1.5 और 1.7 को हटा दिया गया है, साथ ही खंड 1 के स्पष्टीकरण वाले प्रावधान को भी मसौदे से हटाया गया है।
- टीआरपी मापने वाली एजेंसी की किसी भी प्रकार के हितों के टकराव को सख्ती से रोका जाएगा ताकि निष्पक्षता पर सवाल न उठे।
सरकार का उद्देश्य TRP प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक के अनुकूल बनाना है, जिससे मीडिया जगत की विश्वसनीयता और दर्शकों की वास्तविक पसंद को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।
