करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं। मान्यता है कि चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बिना व्रत पूरा नहीं होता। लेकिन खराब मौसम, बारिश या आसमान में घने बादल होने के कारण कई बार चांद दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में महिलाएं कुछ धार्मिक विधियों के जरिए पूजा करके अपना व्रत खोल सकती हैं।
भगवान शिव की पूजा करके खोलें व्रत
यदि चंद्रोदय का समय बीतने के बाद भी चांद नजर नहीं आता, तो महिलाएं भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति के दर्शन कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, महादेव के मस्तक पर चंद्र देव विराजमान हैं। इसलिए शिवजी के दर्शन को चंद्रमा के दर्शन के समान पुण्यदायी माना जाता है। घर में तस्वीर या मूर्ति न होने पर नजदीकी शिव मंदिर जाकर भी पूजा की जा सकती है।
चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर करें पूजा
चांद दिखाई न देने पर घर में चावल से चंद्रमा का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाया जा सकता है। इसके लिए चंद्रोदय की दिशा में साफ चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चावल से चंद्रमा की आकृति बनाएं। छलनी से उस प्रतीकात्मक चंद्रमा को देखकर पूजा करें। इस दौरान ‘ॐ चंद्राय नमः’ या ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए चंद्र देव का स्मरण करें और व्रत का पारण करें।
चंद्रोदय के समय का रखें ध्यान
महिलाएं अपने स्थानीय पंचांग में बताए गए चंद्रोदय के समय तक इंतजार कर सकती हैं। यदि निर्धारित समय के बाद भी बादलों की वजह से चांद दिखाई नहीं देता, तो चंद्र देव का मन में ध्यान करके उनकी दिशा की ओर मुख कर जल अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद मानसिक रूप से अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना करते हुए व्रत खोला जा सकता है। इस विधि में श्रद्धा और भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।
करवा चौथ 2026: चंद्रोदय और पूजा का समय
वर्ष 2026 में करवा चौथ का यह पावन व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन पूजा के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा, जबकि चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट का है। चूंकि अलग-अलग शहरों और भौगोलिक स्थितियों के अनुसार चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए व्रती महिलाओं को अपने शहर के सटीक पंचांग का अवलोकन अवश्य करना चाहिए।
