Israel Election Results 2026: बेंजामिन नेतन्याहू की बढ़त पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘मेरे समर्थन से बदला चुनाव का रुख’

इजरायल के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावी प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि नेतन्याहू के समर्थन में उनके उतरने के बाद चुनाव का रुख बदल गया।

ट्रंप का दावा: नेतन्याहू के समर्थन में उतरने के बाद बदला इजरायल चुनाव का रुख
ट्रंप का दावा: नेतन्याहू के समर्थन में उतरने के बाद बदला इजरायल चुनाव का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनावी प्रदर्शन का श्रेय अपने सार्वजनिक समर्थन को दिया है। इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। बुधवार सुबह तक लगभग 55.4 फीसदी मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 56 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि विपक्षी गठबंधन 49 सीटों पर आगे चल रहा था और अरब दलों को 15 सीटें मिलने का अनुमान था। हालांकि, इन शुरुआती आंकड़ों से किसी भी गठबंधन के लिए स्पष्ट सरकार बनाने की स्थिति तय नहीं हो सकी थी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया कि नेतन्याहू के समर्थन में उतरने के बाद पूरे चुनावी मुकाबले का रुख बदल गया। उन्होंने इसे नेतन्याहू की संभावित बड़ी हार से उबरकर वापसी करने या जीत की ओर बढ़ने से जोड़कर पेश किया।

ट्रंप के समर्थन का दावा और टाइमलाइन

ट्रंप का यह संदेश उनके द्वारा 18 अक्टूबर को नेतन्याहू के पक्ष में दिए गए समर्थन बयान के नौ दिन बाद आया है। उस समय ट्रंप ने नेतन्याहू को एक मजबूत नेता और ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका का बेहद अहम सहयोगी बताया था और इजरायली मतदाताओं से उन्हें फिर से चुनने की अपील की थी। इसके बाद 25 अक्टूबर को भी ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में एक और संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच ईरान विरोधी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नेतन्याहू की वापसी को जरूरी बताया था।

शुरुआती बढ़त के बावजूद सरकार बनाने की चुनौती

इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की आवश्यकता होती है। बुधवार सुबह तक 55.4 फीसदी मतों की गिनती के बाद नेतन्याहू का गठबंधन 56 सीटों पर था, जो बहुमत के आंकड़े से 5 सीट दूर है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिख रहा था।

चुनावी सर्वेक्षणों में पहले नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत से काफी दूर रहने का अनुमान लगाया गया था। शुरुआती नतीजे उनके लिए उम्मीद से बेहतर जरूर रहे, लेकिन यह साबित नहीं होता कि यह प्रदर्शन केवल ट्रंप के समर्थन के कारण ही सुधरा है। इजरायल में मतदाता राजनीतिक दलों को वोट देते हैं और बाद में गठबंधनों के जरिए सरकार तय होती है।

क्रेडिट लेने का पुराना रुख और भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और संघर्षों में अपनी भूमिका का श्रेय लेते रहे हैं। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के बाद 10 मई को जब संघर्षविराम की घोषणा हुई थी, तब ट्रंप ने दर्जनों बार दावा किया था कि अमेरिकी हस्तक्षेप और व्यापारिक पाबंदियों की चेतावनी से दोनों देश पीछे हटे।

हालांकि, भारत सरकार ने अमेरिकी मध्यस्थता के इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया था। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया था कि दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य बातचीत के जरिए संघर्ष रुका था और इसमें किसी तीसरे देश या व्यापार समझौते की भूमिका नहीं थी। इसके अलावा, ट्रंप ने इजरायल-ईरान, थाईलैंड-कंबोडिया और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे कई अन्य वैश्विक संघर्षों को रुकवाने का दावा भी किया है।

विदेशी चुनावों में सीधे समर्थन की रणनीति

अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप लगातार विभिन्न देशों के पसंदीदा नेताओं के पक्ष में बयान देते रहे हैं। उन्होंने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची सहित कई नेताओं का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है।

क्या वाकई ट्रंप के समर्थन से मिली बढ़त?

ट्रंप के समर्थन से नेतन्याहू को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार और राजनीतिक मजबूती जरूर मिली, लेकिन केवल इसके आधार पर चुनावी बढ़त का श्रेय ट्रंप को देना जल्दबाजी होगी। इजरायल में मतदाता मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्था, ईरान के साथ जारी संघर्ष, 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद सरकार की जवाबदेही, गाजा युद्ध और नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों जैसे गंभीर घरेलू मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट करते हैं। फिलहाल, शुरुआती नतीजे नेतन्याहू को राहत जरूर देते हैं, लेकिन 61 सीटों का जादूई आंकड़ा जुटाकर सरकार बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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